New Labour Codes: केंद्र में न्यूनतम मजदूरी ₹350-₹450 तक बढ़ने की संभावना, राज्यों में भी salary revision तेज

Edited By Updated: 17 Apr, 2026 11:22 AM

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न्यूनतम मजदूरी में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। केंद्र सरकार देश में minimum daily wage को ₹350 से ₹450 तक बढ़ाने पर विचार कर सकती है।  हाल ही में नोएडा हुए श्रमिक विरोध प्रदर्शनों के चलते उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों को भी मजदूरी...

नई दिल्ली: न्यूनतम मजदूरी में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। केंद्र सरकार देश में minimum daily wage को ₹350 से ₹450 तक बढ़ाने पर विचार कर सकती है।  हाल ही में नोएडा हुए श्रमिक विरोध प्रदर्शनों के चलते उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों को भी मजदूरी बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि Union Labor Ministry कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल श्रमिकों को शामिल करते हुए एक संशोधित वेतन संरचना पर काम कर रहा है। राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी अधिसूचित होने के बाद, राज्यों को अपनी मजदूरी दरों को इसके अनुरूप करना होगा, क्योंकि कोई भी राज्य केंद्रीय मानक से कम मजदूरी निर्धारित नहीं कर सकता है। मासिक मजदूरी की गणना अंतिम दैनिक मजदूरी के 26 गुना के आधार पर की जाएगी। वर्तमान राष्ट्रीय national minimum wage 176 रुपये है, जिसे 2017 में निर्धारित किया गया था।

आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में पाया गया कि कंपनियों ने पिछले चार सालों में लगभग 22% का स्थिर EBITDA margin बनाए रखा है, जबकि Salary increment धीमी रही है। इसमें प्रवेश स्तर के आईटी कर्मचारियों के वेतन में ठहराव की ओर भी इशारा किया गया है। वेतन और श्रम कानूनों को सरल बनाने के लिए चार श्रम संहिताएं लागू की गई थीं। 

-वेतन संहिता (2019): देश में न्यूनतम वेतन और समान वेतन की व्यवस्था
-औद्योगिक संबंध संहिता (2020): नौकरी से जुड़े नियम और विवाद समाधान
-सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020): अधिक श्रमिकों को सामाजिक लाभ
-व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता (2020): कार्यस्थल सुरक्षा में सुधार

हरियाणा में minimum wage में 35% की वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में minimum wage में लगभग 35% की वृद्धि हुई है, जिससे अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन बढ़कर लगभग 15,200 रुपये हो गया है। श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के बाद, उत्तर प्रदेश ने नोएडा और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये प्रति माह कर दिया है। अर्ध-कुशल श्रमिकों को अब 12,445 रुपये के मुकाबले 15,059 रुपये मिलते हैं, जबकि कुशल श्रमिकों को पहले के 13,940 रुपये के मुकाबले 16,868 रुपये मिलते हैं।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु ने संकेत दिया है कि वे आवश्यकता पड़ने पर वेतन की समीक्षा कर सकते हैं, क्योंकि उनका मौजूदा वेतन स्तर प्रस्तावित न्यूनतम वेतन के लगभग बराबर या उससे अधिक है। बिहार और पंजाब भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने मिंट को बताया कि राज्य ने अपने वेतन वृद्धि प्रस्ताव को वित्त विभाग के विचारार्थ भेज दिया है।

Minimum Wage राज्यों में काफी अलग है। कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में अकुशल श्रमिकों को अधिक वेतन मिलता है, जहां उन्हें लगभग 15,000-16,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं। गुजरात में यह वेतन लगभग 12,700-13,000 रुपये है, जबकि बिहार और पंजाब में यह कम है।

 वहीं, बिहार के पूर्व मंत्री और भाजपा नेता राम सूरत राय ने कहा, सरकार को जीवन यापन की लागत के आधार पर नियमित रूप से वेतन में संशोधन करना चाहिए ताकि श्रमिक अपने दैनिक खर्चों का प्रबंधन कर सकें। यदि वेतन में हर साल संशोधन किया जाता है, तो बाद में अचानक होने वाली वृद्धि से बचा जा सकेगा और श्रमिकों और उद्योगों दोनों के लिए समायोजन करना आसान हो जाएगा।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणजीत रंजन ने बताया, मजदूरों की मजदूरी बढ़ती कीमतों के अनुरूप बढ़नी चाहिए ताकि वे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा कर सकें। कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे गैर-भाजपा शासित राज्य पहले से ही वार्षिक रूप से मजदूरी में संशोधन कर रहे हैं। अन्य राज्यों को भी समय पर संशोधन सुनिश्चित करने और मजदूरों के बीच असुविधा से बचने के लिए इसी तरह का दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

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