Edited By Mehak,Updated: 03 Feb, 2026 06:45 PM

गरुड़ पुराण के अनुसार, जीवन में किए गए कर्म आत्मा और आयु पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इसमें बताया गया है कि ब्राह्मणों का अपमान, माता-पिता और गुरु का तिरस्कार, पराई स्त्री से संबंध, झूठ, चोरी और हिंसा जैसे पाप गंभीर परिणाम ला सकते हैं और अकाल मृत्यु का...
नेशनल डेस्क : हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण को बहुत महत्वपूर्ण ग्रंथ माना गया है। यह सिर्फ धार्मिक नियमों की किताब नहीं है, बल्कि जीवन, मृत्यु और कर्मों के प्रभाव को समझाने वाला ग्रंथ भी है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने गरुड़ को बताया है कि इंसान के अच्छे-बुरे कर्म केवल इस जन्म तक सीमित नहीं रहते, बल्कि आत्मा की आगे की यात्रा और जन्म-मरण के चक्र को भी प्रभावित करते हैं। इसमें कुछ ऐसे कर्मों को गंभीर पाप बताया गया है, जो व्यक्ति के जीवन को संकट में डाल सकते हैं और अकाल मृत्यु का कारण भी बन सकते हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार, ब्राह्मणों और विद्वानों का अपमान करना बड़ा पाप माना गया है। ज्ञान, संस्कार और धर्म का सम्मान न करना आत्मा पर नकारात्मक असर डालता है और व्यक्ति के जीवन में अशांति लाता है। इसी तरह माता-पिता, गुरु और देवताओं का तिरस्कार भी अत्यंत दोषपूर्ण बताया गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि जिन लोगों में अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति आदर और कृतज्ञता होती है, उनका जीवन अधिक सुखी और संतुलित रहता है।
इसके अलावा, पराई स्त्री के साथ गलत संबंध बनाना, झूठ बोलना, चोरी करना, हिंसा करना और जीवों की हत्या जैसे कर्म भी पाप की श्रेणी में आते हैं। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि ऐसे कर्म व्यक्ति को आत्मिक अंधकार की ओर ले जाते हैं और उसके जीवन में परेशानियां बढ़ाते हैं।
हालांकि, गरुड़ पुराण केवल पापों का वर्णन ही नहीं करता, बल्कि उनसे बचने के उपाय भी बताता है। इसमें कहा गया है कि भगवान विष्णु की भक्ति, दान-पुण्य, सत्य और अहिंसा का पालन, शुद्ध भोजन, माता-पिता की सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने से पापों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। गरुड़ पुराण का संदेश साफ है जैसे कर्म होंगे, वैसा ही फल होगा और जितना हम पाप करेंगे उतने ही नरक के भोगी बनेंगे।