सेवानिवृत्त सैन्य अफसरों संग विचार-विमर्श, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोले भागवत

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 08:50 PM

bhagwat spoke on discussions with retired military officers

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन राव जी भागवत का 25.02.2026 को पठानकोट दौरा हुआ, जिसमें उन्होंने किरण ऑडिटोरियम, पठानकोट में सेवानिवृत्त कमीशंड सैन्य अधिकारियों के साथ एक गरिमापूर्ण एवं प्रेरणादायी संवाद गोष्ठी की।

नेशनल डेस्क : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक माननीय डॉ. मोहन राव जी भागवत का 25.02.2026 को पठानकोट दौरा हुआ, जिसमें उन्होंने किरण ऑडिटोरियम, पठानकोट में सेवानिवृत्त कमीशंड सैन्य अधिकारियों के साथ एक गरिमापूर्ण एवं प्रेरणादायी संवाद गोष्ठी की।

कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक रूप से “वन्दे मातरम्” के गायन से हुई, जिससे पूरा सभागार राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत हो उठा। कार्यक्रम स्थल पर “वन्दे मातरम्” के इतिहास, उसकी गरिमा तथा उसके गायन से जुड़े प्रोटोकॉल पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई थी। साथ ही तीनों सेनाओं के परमवीर चक्र  प्राप्त वीरों का परिचय कराती प्रदर्शनी ने उपस्थित सभी अधिकारियों को गहन प्रेरणा दी।

अपने उद्बोधन में डॉ. भागवत  ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना, उद्देश्य और कार्यपद्धति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ को सही रूप में समझने के लिए उसके कार्य को भीतर से जानना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) किसी प्रकार की प्रतिस्पर्धा या प्रचार की भावना से कार्य नहीं करता, बल्कि केवल राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर समाज के बीच सक्रिय रहता है। संघ सत्ता या लोकप्रियता का इच्छुक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ समाज से अलग कोई संस्था नहीं, बल्कि समाज का ही संगठित रूप है। वर्तमान में संघ देशभर में 1,30,000 से अधिक सेवा कार्यों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहा है।

डॉ. भागवत  ने सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक जीवन मूल्यों, स्वदेशी तथा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना विविधता में एकता का श्रेष्ठ उदाहरण है और यही भावना समाज जीवन में भी सुदृढ़ होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में अनेक अन्य व्यक्ति और संगठन भी राष्ट्रहित के कार्यों में लगे हुए हैं; हमें उनका सहयोग करना चाहिए और उनके साथ मिलकर कार्य करना चाहिए।

“पंच परिवर्तन” का उल्लेख करते हुए उन्होंने सामाजिक समरसता, पारिवारिक जीवन मूल्यों की मजबूती, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, स्वदेशी भावना और नागरिक कर्तव्यनिष्ठा को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन ही राष्ट्र को सशक्त बनाता है। सेना के अनुशासन, निष्ठा और समर्पण जैसे गुण समाज जीवन में भी अपनाए जाने चाहिए। पर्यावरण के संदर्भ में उन्होंने प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने पर बल दिया। उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया गया तथा फ्लेक्स बैनरों का उपयोग भी नहीं हुआ।

पारिवारिक जीवन मूल्यों पर बोलते हुए उन्होंने संयुक्त परिवार व्यवस्था को भारतीय समाज की शक्ति बताया, जहाँ सम्मान, संस्कार और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। स्वदेशी के संदर्भ में उन्होंने आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताया। कार्यक्रम स्थल पर गौ सेवा संस्थान द्वारा लगाए गए स्टॉल तथा ग्रामीण एवं गृह-आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी ने इस विचार को व्यवहार में प्रस्तुत किया।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि केवल सीमाओं की रक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता, आर्थिक मजबूती और सांस्कृतिक आत्मविश्वास भी उतने ही आवश्यक हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें अधिकारियों ने विभिन्न समसामयिक विषयों पर अपने प्रश्न रखे। डॉ. भागवत जी ने विस्तार से उनके उत्तर दिए।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान “जन गण मन” के सामूहिक गायन के साथ हुआ। समापन के समय पूरा वातावरण देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण था और उपस्थित सभी अधिकारियों में राष्ट्रसेवा का नव संकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।

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