महादेव ऐप केस में बड़ा एक्शन, मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाई CBI

Edited By Updated: 01 Nov, 2026 10:08 PM

cbi brought saurabh chandrakar to india from oman

देश के सबसे बड़े कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटालों में शामिल महादेव ऐप केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बड़ी सफलता मिली है। भारत की जांच एजेंसियों के प्रयासों के बाद ओमान से प्रत्यर्पित कर महादेव ऑनलाइन बुक सिंडिकेट के मुख्य प्रमोटर सौरभ...

नई दिल्ली/रायपुर: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर, महादेव ऐप के अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के मुख्य सरगना और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान सल्तनत से प्रत्यर्पित कराने में सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई रविवार को हुई। ओमान भेजी गई सीबीआई की एक विशेष टीम उसे वापस भारत ले आई है। चंद्राकर, जो सीबीआई के दो मामलों (जिनमें चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है) और ईडी के एक मामले (जिसमें अभियोजन शिकायत दाखिल की जा चुकी है) में वांछित था, उसे कल रायपुर की सीबीआई विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। 

सीबीआई ने एक बयान में कहा कि यह प्रत्यर्पण भारत के उन लगातार प्रयासों में एक अहम पड़ाव है, जिनका मकसद विदेशों से भारतीय नागरिकों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वाले भगोड़ों को वापस लाना और उन्हें भारतीय कानून की उचित प्रक्रिया का सामना करने के लिए मजबूर करना है।

छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर शुरू की गई जांच से पता चला कि‘महादेव ऑनलाइन बुक'देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक था, जिसे भारत के बाहर से चलाया जा रहा था। यह भारत भर में फैले‘पैनल'और‘शाखाओं'के एक नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेलों और अन्य आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी की सुविधा देता था। इस नेटवर्क के जरिए उपयोगकर्ताओं को जोड़ा जाता था और उनसे दांव की रकम इकट्ठा की जाती थी। अवैध सट्टेबाजी से मिली रकम को कई‘म्यूल'बैंक खातों के जरिए घुमाया गया, कई लेन-देन के माध्यम से इसकी परतें बनाई गईं और हवाला चैनलों के जरिए इसे विदेश भेज दिया गया। 

जांच में यह भी पता चला कि इस रकम के एक हिस्से का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों को‘प्रोटेक्शन मनी'(सुरक्षा के बदले दी जाने वाली रकम) देने के लिए किया गया, ताकि यह सिंडिकेट बिना किसी रुकावट के अपना काम जारी रख सके। सीबीआई ने‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी आईपीसी की धाराओं, तथा‘छत्तीसगढ़ जुआ (निषेध) अधिनियम'के तहत चार्जशीट दाखिल की है। इन चार्जशीट में मुख्य आरोपियों में सौरभ चंद्राकर का नाम भी शामिल है, और ईडी ने भारत तथा विदेशों में उसकी कई संपत्तियों को भी जब्त किया है। 

सौरभ चंद्राकर के खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर, रॉयल ओमान पुलिस ने उसे ढूंढ़ निकाला और हिरासत में ले लिया। सीबीआई और ईडी ने तुरंत ओमान सल्तनत को औपचारिक प्रत्यर्पण प्रस्ताव भेजे, साथ ही आरोपी के खिलाफ जुटाए गए सभी सबूत भी सौंप दिए। प्रत्यर्पण का अनुरोध, भारत सरकार की एजेंसियों और इंटरपोल नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के साथ करीबी समन्वय में, तथा ओमान सल्तनत के सक्षम अधिकारियों के सहयोग से आगे बढ़ाया गया। प्रत्यर्पण की मंजूरी मिलने के बाद,सीबीआई की एक टीम मस्कट गई और उसे वापस भारत ले आई। 

सीबीआई, ओमान सल्तनत की सरकार और रॉयल ओमान पुलिस द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त करती है। यह दोनों देशों के बीच घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंधों को दर्शाता है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के उनके साझा संकल्प को भी जाहिर करता है। आरोपी की मेडिकल जांच कराई जाएगी, ट्रांजिट रिमांड ली जाएगी और उसे रायपुर ले जाकर कल सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के सामने पेश किया जाएगा। 

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