भारत में स्ट्रोक का बढ़ता खतरा, 56% मौतों के पीछे हाई BP, तंबाकू भी बड़ी वजह

Edited By Updated: 28 Oct, 2026 05:30 PM

rising risk of stroke in india tobacco is also a major factor

विश्व स्ट्रोक दिवस से एक दिन पहले विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में स्ट्रोक के मामलों और इससे होने वाली मौतों को कम करने के लिए तंबाकू की लत छुड़ाने में लगातार मदद देना और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।

नई दिल्ली । विश्व स्ट्रोक दिवस से एक दिन पहले विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में स्ट्रोक के मामलों और इससे होने वाली मौतों को कम करने के लिए तंबाकू की लत छुड़ाने में लगातार मदद देना और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने जनस्वास्थ्य के लिए ऐसे ठोस कदम उठाने की अपील की, जो केवल जागरूकता अभियान चलाने तक सीमित न हों। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2024 के आंकड़ों के एक विश्लेषण में अनुमान लगाया गया है कि भारत में स्ट्रोक से होने वाली मौतों में 12 प्रतिशत का योगदान तंबाकू के इस्तेमाल का था, जबकि सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर अधिक होने के कारण 56 प्रतिशत मौतें हुईं। इससे पता चलता है कि बचाव और समय पर इलाज के जरिए कई जोखिमों से एक साथ निपटना जरूरी है। 

तंबाकू छुड़ाने पर भी ध्यान देना जरूरी
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)-दिल्ली में न्यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. अवध किशोर पंडित ने कहा कि स्ट्रोक की रोकथाम में उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और हृदय संबंधी अन्य जोखिमों की समय रहते पहचान करना और उनका प्रभावी प्रबंधन करना भी शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही तंबाकू छुड़ाने पर भी ध्यान देना जरूरी है। पंडित ने कहा, "लोगों को बचाव के उपाय शुरू करने के लिए लक्षण सामने आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। नियमित रूप से रक्तचाप की जांच, डॉक्टर के परामर्श से नियमित रूप से दवाएं लेना, शारीरिक गतिविधियां और संतुलित आहार स्ट्रोक का खतरा कम करने में मदद कर सकते हैं। स्ट्रोक के मामलों और उनके लंबे समय तक रहने वाले दुष्परिणामों को कम करने के लिए व्यक्ति के जोखिम का आकलन, लगातार तंबाकू छुड़ाने वाली सेवाएं और बड़े स्तर पर रोकथाम के उपायों को मिलाकर एक व्यापक रणनीति जरूरी है।" 

निकोटीन की लत के कारण तंबाकू छोड़ना मुश्किल
नोएडा के मेदांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में न्यूरोसर्जरी और न्यूरोसाइंसेज के निदेशक डॉ. यशपाल सिंह बुंदेला ने कहा, "हम लोगों से बार-बार तंबाकू छोड़ने के लिए कहकर यह नहीं मान सकते कि समस्या हल हो गई है। निकोटीन की लत के कारण तंबाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है, भले ही लोगों को इसके स्वास्थ्य संबंधी खतरों की जानकारी हो। तंबाकू से जुड़ी बीमारियों का बढ़ता बोझ जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसलिए हमें अभी कदम उठाने की जरूरत है।" बुंदेला ने कहा कि लोगों को धूम्रपान छोड़ने में मदद करना प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की वरिष्ठ सलाहकार न्यूरोलॉजिस्ट और संयुक्त प्रबंध निदेशक डॉ. सोनिया लाल गुप्ता ने कहा कि पहले स्ट्रोक को मुख्य रूप से बुजुर्गों को प्रभावित करने वाली एक मेडिकल इमरजेंसी माना जाता था, लेकिन अब यह कम उम्र के लोगों के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। 

उन्होंने चेतावनी दी कि अनियंत्रित उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और लक्षणों को पहचानने में देरी से स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों ने आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने, स्ट्रोक के शुरुआती चेतावनी संकेतों को समय पर पहचानने और आपातकालीन इलाज तक जल्द पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। पंजाबी बाग स्थित सीके बिरला अस्पताल में श्वसन चिकित्सा विभाग के निदेशक डॉ. विकास मित्तल ने कहा, "जनस्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हमें तंबाकू नियंत्रण के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर उन देशों के अनुभवों से सीखना होगा, जिन्होंने तंबाकू का इस्तेमाल कम करने में प्रगति की है।" उन्होंने कहा, "भारत में इस बात पर खुली और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित चर्चा होनी चाहिए कि क्या तंबाकू पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने या रोकथाम और तंबाकू छोड़ने के लिए नए व अधिक प्रभावी तरीके अपनाने से जनस्वास्थ्य के बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।"

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!