60 साल पुराने भवन हटेंगे, केंद्रीय सचिवालय में आएगा बड़ा बदलाव

Edited By Updated: 21 Jan, 2026 12:46 PM

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दिल्ली के लुटियंस ज़ोन की पहचान बन चुके कृषि भवन और शास्त्री भवन अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहे हैं। 'सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना' के अगले चरण के तहत इन प्रतिष्ठित इमारतों को विदा करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है। इनकी जगह...

नेशनल डेस्क: दिल्ली के लुटियंस ज़ोन की पहचान बन चुके कृषि भवन और शास्त्री भवन अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहे हैं। 'सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना' के अगले चरण के तहत इन प्रतिष्ठित इमारतों को विदा करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है। इनकी जगह लगभग ₹3,000 करोड़ के निवेश से एक अत्याधुनिक और एकीकृत प्रशासनिक परिसर (कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट) खड़ा किया जाएगा।

यादों में सिमटता साढ़े छह दशकों का सफर
ये भवन केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की नीतिगत यात्रा के साक्षी रहे हैं:
कृषि भवन:
1950 के दशक के मध्य में निर्मित यह भवन करीब 65-70 साल पुराना है। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के दौर में शुरू हुआ यह कार्यालय कृषि और ग्रामीण विकास की नीतियों का मुख्य केंद्र रहा है।

शास्त्री भवन: 1960 के दशक की यह इमारत पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की स्मृतियों को संजोए हुए है। पिछले 60 वर्षों से यहाँ शिक्षा, कानून और सूचना-प्रसारण जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की रणनीतियां बनती आई हैं।

क्यों जरूरी हुआ यह 'सर्जिकल स्ट्राइक'?
पुरानी इमारतों को ढहाने का निर्णय केवल सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और कार्यक्षमता से जुड़ा है: सुरक्षा मानकों की कमी: ये इमारतें न तो भूकंप-रोधी (Earthquake-proof) हैं और न ही इनमें आधुनिक अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) के पर्याप्त इंतजाम हैं। बिजली की अत्यधिक खपत वाली पुरानी एसी प्रणाली और इंटरनेट के तारों का बेतरतीब जाल अब आधुनिक कामकाज में बाधा बन रहा है। वर्तमान में कई मंत्रालय निजी इमारतों में किराए पर चल रहे हैं। सबको एक छत के नीचे लाने से सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ कम होगा।

 ₹3,000 करोड़ का 'स्मार्ट' मास्टर प्लान
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने इस बदलाव के लिए निविदाएं जारी कर दी हैं। नया ढांचा पुराने सचिवालय से पूरी तरह अलग होगा: डिजिटल इंडिया का चेहरा: नई इमारतें पूरी तरह स्मार्ट और हाई-टेक होंगी। मंत्रालयों के बीच निर्बाध आवाजाही के लिए भूमिगत ट्रांजिट सिस्टम की योजना है। कृषि और शास्त्री भवन के बाद निर्माण भवन और उद्योग भवन को भी इसी तरह नए स्वरूप में ढाला जाएगा।

मिशन 2047 की ओर कदम
नया संसद भवन बनने के बाद अब कर्तव्य पथ के दोनों ओर एक ऐसा प्रशासनिक गलियारा तैयार किया जा रहा है, जो 'विकसित भारत @2047' के विजन को चरितार्थ करे। उद्देश्य साफ है—दुनिया का सबसे आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल प्रशासनिक हब तैयार करना। 

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