Edited By Mehak,Updated: 27 Feb, 2026 05:03 PM

1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े कई नए नियम लागू हो सकते हैं। बड़े लेन-देन पर निगरानी बढ़ सकती है और नकद या डिजिटल भुगतान पर अलग-अलग लिमिट तय की जा सकती है। कार्ड स्टेटमेंट को पहचान और पते के प्रमाण के रूप में मान्यता देने, टैक्स और जीएसटी पेमेंट...
नेशनल डेस्क : आज के समय में क्रेडिट कार्ड आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। खरीदारी, यात्रा, ऑनलाइन बिल भुगतान, रिचार्ज और टैक्स जमा करने तक में इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है। कैशलेस भुगतान की सुविधा और रिवॉर्ड पॉइंट्स जैसी सुविधाओं ने इसे और लोकप्रिय बना दिया है। अब 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव हो सकते हैं। इन संभावित बदलावों का सीधा असर कार्ड उपयोग करने वाले लोगों पर पड़ सकता है।
बड़े लेन-देन पर बढ़ सकती है निगरानी
नए प्रस्तावित नियमों के तहत सालभर में किए गए बड़े भुगतान पर विशेष नजर रखी जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित सीमा से अधिक राशि क्रेडिट कार्ड बिल के रूप में जमा करता है, तो उसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी जा सकती है। इस कदम का उद्देश्य वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाना और अनियमित गतिविधियों पर नियंत्रण रखना है।
डिजिटल और नकद भुगतान के लिए अलग-अलग सीमा
संभावना है कि डिजिटल पेमेंट और नकद भुगतान के लिए अलग-अलग लिमिट तय की जाए। जो लोग नकद में क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाते हैं, उनके लिए नियम सख्त हो सकते हैं। तय सीमा से अधिक कैश जमा करने पर इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य की जा सकती है। इसका मतलब यह है कि अब बड़ी रकम को बिना रिकॉर्ड के चुकाना आसान नहीं होगा। कैश से भुगतान करने वालों को पहले से योजना बनाकर भुगतान करना होगा।
पहचान और पते के प्रमाण में मिल सकता है नया विकल्प
एक और अहम बदलाव दस्तावेज से जुड़ा हो सकता है। क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट को पहचान पत्र (ID Proof) और पते के प्रमाण (Address Proof) के रूप में स्वीकार करने पर विचार किया जा रहा है। अगर यह नियम लागू होता है, तो नए कार्ड के आवेदन या अपडेट के समय लोगों को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। इससे प्रक्रिया कुछ हद तक आसान हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास सीमित दस्तावेज हैं।
टैक्स और GST भुगतान में बढ़ सकता है उपयोग
सरकार क्रेडिट कार्ड को टैक्स और जीएसटी भुगतान के लिए आधिकारिक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के रूप में शामिल करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, कार्ड के जरिए टैक्स भुगतान करने पर प्रोसेसिंग शुल्क लग सकता है। इसलिए भुगतान से पहले संबंधित शुल्क और नियमों को समझना जरूरी होगा, ताकि अतिरिक्त खर्च से बचा जा सके।
कॉर्पोरेट क्रेडिट कार्ड पर भी कड़े नियम
कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को दिए जाने वाले क्रेडिट कार्ड पर भी नियम सख्त किए जा सकते हैं। यदि कंपनी बिल का भुगतान करती है, तो खर्च का पूरा रिकॉर्ड रखना जरूरी होगा। निजी खर्च और ऑफिस खर्च को अलग-अलग दिखाना अनिवार्य हो सकता है।
पैन नंबर हो सकता है अनिवार्य
नया क्रेडिट कार्ड जारी करते समय पैन नंबर देना अनिवार्य किया जा सकता है। इससे वित्तीय लेन-देन की निगरानी और मजबूत होगी तथा कर संबंधी जानकारी अधिक स्पष्ट रहेगी।
क्या करें कार्ड यूजर्स?
- बड़े लेन-देन से पहले निर्धारित सीमा की जानकारी रखें।
- नकद भुगतान करते समय नियमों को समझें।
- टैक्स या जीएसटी भुगतान से पहले प्रोसेसिंग फीस की जांच करें।
- सभी भुगतान और खर्च का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
कुल मिलाकर, इन संभावित बदलावों का उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना और लेन-देन को अधिक व्यवस्थित बनाना है। ऐसे में क्रेडिट कार्ड उपयोग करने वालों को नए नियमों की जानकारी रखना और सोच-समझकर भुगतान करना जरूरी होगा।