Edited By Tanuja,Updated: 10 Feb, 2026 03:15 PM

नई दिल्ली में हुई पहली ब्रिक्स शेरपा बैठक में चीन के उप विदेश मंत्री मा झाओसू ने भाग लिया। बैठक में ब्रिक्स सहयोग की प्राथमिकताओं, 18वें शिखर सम्मेलन की तैयारी और भारत की अध्यक्षता के तहत “मानवता-प्रथम” दृष्टिकोण पर चर्चा हुई।
International Desk: नई दिल्ली में आयोजित पहली ब्रिक्स शेरपा बैठक में चीन के ब्रिक्स शेरपा और उप विदेश मंत्री मा झाओसू ने हिस्सा लिया। इस बैठक को ब्रिक्स के भविष्य के एजेंडे और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि मा झाओसू ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा प्रस्तुत “उच्च गुणवत्ता वाले व्यापक ब्रिक्स सहयोग” की अवधारणा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को शांति, नवाचार, हरित विकास, न्याय और जन-से-जन संपर्क को मजबूत करने वाला मंच बनाया जाना चाहिए।
राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि ये सिद्धांत ब्रिक्स तंत्र के भविष्य की दिशा तय करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीन, भारत की अध्यक्षता में, अन्य ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के साथ मिलकर सहयोग को और गहरा करने के लिए तैयार है। चीन ने ब्रिक्स सहयोग के सही मार्ग पर आगे बढ़ने, व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने, कार्य प्रणाली में सुधार, बहुपक्षीय समन्वय को सशक्त करने और अंतरराष्ट्रीय न्याय व निष्पक्षता को बनाए रखने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान सदस्य देशों ने वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स की प्राथमिकताओं, प्रमुख आयोजनों की रूपरेखा और 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंधों के सचिव और भारत के ब्रिक्स शेरपा सुधाकर डलेला ने प्रधानमंत्री के “जन-केंद्रित” और “मानवता-प्रथम” दृष्टिकोण पर आधारित भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं को सामने रखा। इस वर्ष ब्रिक्स की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” रखी गई है।
बैठक में बेलारूस के भारत में राजदूत एम. कास्को ने भी भाग लिया। बेलारूस ने एक ब्रिक्स साझेदार देश के प्रतिनिधि के रूप में पहली बार इस स्तर की बैठक में हिस्सा लिया। बेलारूस के राजदूत ने आयोजन के लिए भारत का आभार जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में ब्रिक्स का यह वर्ष नई उपलब्धियों और सफलताओं से भरा होगा, जिससे यह संगठन दुनिया के सबसे प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय मंचों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।