“मेरे भाई को फोन करने की हिम्मत कैसे हुई?” CJI सूर्यकांत का कोर्ट में गुस्सा, बोले– देश से बाहर भी गए तो नहीं बचेंगे

Edited By Updated: 25 Mar, 2026 09:51 PM

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उस वक्त माहौल अचानक गंभीर हो गया, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक याचिकाकर्ता के पिता की हरकत पर कड़ी नाराजगी जताई।

नेशनल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उस वक्त माहौल अचानक गंभीर हो गया, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक याचिकाकर्ता के पिता की हरकत पर कड़ी नाराजगी जताई। CJI ने खुली अदालत में कहा कि उनके परिवार से संपर्क कर कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाना बेहद गंभीर मामला है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि “अगर कोई व्यक्ति न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।”

 फोन कॉल पर भड़के CJI, दी कड़ी चेतावनी

सुनवाई के दौरान जानकारी सामने आई कि याचिकाकर्ता के पिता ने CJI के भाई को फोन कर फैसले पर सवाल उठाया था। इस पर अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। CJI ने वकील से कहा कि उनके मुवक्किल की यह हरकत अस्वीकार्य है और अगर ऐसा दोबारा हुआ तो सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि “चाहे कोई देश से बाहर भी क्यों न चला जाए, कानून से बच नहीं सकता।” वकील ने तुरंत सफाई दी और कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी, साथ ही उन्होंने कोर्ट से माफी भी मांगी।

एडमिशन और माइनॉरिटी कोटा से जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला सुभारती मेडिकल कॉलेज में पोस्टग्रेजुएट एडमिशन से जुड़ा है। हरियाणा के दो अभ्यर्थियों ने बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे के तहत दाखिले की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया है और इसके प्रमाण भी मौजूद हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इस दावे पर संदेह जताया था और इसे संभावित रूप से गलत तरीके से लाभ लेने की कोशिश बताया था।

पहले भी कोर्ट ने जताया था शक

इससे पहले सुनवाई में अदालत ने कहा था कि अगर धर्म परिवर्तन केवल एडमिशन पाने के लिए किया गया है, तो यह एक तरह की धोखाधड़ी हो सकती है। कोर्ट ने इस मामले में संबंधित राज्य से जांच रिपोर्ट भी मांगी थी।

 न्यायपालिका की गरिमा पर सख्त संदेश

इस पूरे घटनाक्रम के बाद साफ हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी तरह के दबाव या हस्तक्षेप को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। CJI सूर्यकांत की सख्त टिप्पणी को न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

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