छात्र प्रदर्शन के बीच जामिया में कक्षाएं ऑनलाइन, SFI ने धरनास्थल पर कार्रवाई का आरोप लगाया

Edited By Updated: 24 Oct, 2026 08:58 PM

classes at jamia move online amid student protests

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने छात्रसंघ के चुनाव कराने की मांग को लेकर बढ़ते तनाव के बीच शनिवार को कक्षाएं ऑनलाइन आयोजित कीं। भूख हड़ताल स्थल पर प्रदर्शनकारी छात्रों और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बीच टकराव के बाद यह फैसला लिया गया। रजिस्ट्रार...

नेशनल डेस्क : जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने छात्रसंघ के चुनाव कराने की मांग को लेकर बढ़ते तनाव के बीच शनिवार को कक्षाएं ऑनलाइन आयोजित कीं। भूख हड़ताल स्थल पर प्रदर्शनकारी छात्रों और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बीच टकराव के बाद यह फैसला लिया गया। रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी एक नोटिस में विश्वविद्यालय ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिक्षण को निर्बाध बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम के तौर पर कक्षाएं ऑनलाइन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

विश्वविद्यालय ने सभी पाठ्यक्रमों के छात्रों से ऑनलाइन कक्षाओं के निर्धारित समय का पालन करने और परिसर में आने से बचने का आग्रह किया। इसने कहा कि अगले आदेश तक विश्वविद्यालय के द्वार और पुस्तकालय बंद रहेंगे। यह घटनाक्रम उस समय हुआ, जब कुलपति मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिजवी सहित शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के 1,500 से अधिक सदस्य सुबह अंसारी सभागार के लॉन में एकत्र हुए और बाद में प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त करने का आग्रह करने के लिए गेट नंबर-7 तक मार्च किया। विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से छात्रों से प्रदर्शन स्थल खाली करने और परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील करने का फैसला किया।

बयान में कहा गया कि विश्वविद्यालय ने उन दीवारों पर दोबारा रंग-रोगन करने का भी निर्णय लिया, जिन पर कथित तौर पर ''आपत्तिजनक नारे'' लिखे गए थे। विश्वविद्यालय के अनुसार, कर्मचारियों ने प्रदर्शन समाप्त करने के लिए करीब दो घंटे तक छात्रों को मनाने की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने नारेबाजी जारी रखी और शिक्षकों से वापस जाने को कहा। प्रशासन ने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा गार्ड, कर्मचारियों और शिक्षकों के साथ धक्का-मुक्की की। हालांकि, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की जामिया इकाई ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर और रजिस्ट्रार समेत अन्य अधिकारियों ने सुरक्षा सलाहकार के साथ मिलकर भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को जबरन हटाने की कोशिश की।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि टकराव के दौरान तंबू उखाड़ दिए गए और छात्राओं को घसीटा गया। छात्रों ने कथित तौर पर बल प्रयोग किए जाने को लेकर मुख्य प्रॉक्टर और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग भी की है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद एक छात्र ने आरोप लगाया कि बातचीत विफल होने के बाद प्रशासन के प्रतिनिधियों ने सुरक्षा गार्ड और शिक्षकों के साथ मिलकर प्रदर्शनकारियों के तंबू हटाने की कोशिश की।

छात्र के अनुसार, अगले 15 से 20 मिनट में स्थिति बिगड़ गई। उसने दावा किया कि भूख हड़ताल कर रहे पांच छात्र एक विभाग के अंदर चले गए, जबकि अन्य छात्रों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। छात्र ने यह भी दावा किया कि विश्वविद्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे, छात्रों को परिसर में प्रवेश करने से रोका जा रहा था और कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। करीब दो सप्ताह पहले शुरू हुआ यह प्रदर्शन जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ (जेएमआईएसयू) को बहाल करने की मांग पर केंद्रित है। छात्रों का कहना है कि 2006 के बाद से छात्रसंघ के चुनाव नहीं हुए हैं। 

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