condom prices hike: 50% तक महंगे हो सकते हैं कंडोम, अमोनिया-सिलिकॉन Oil की सप्लाई टूटने से मची खलबली

Edited By Updated: 02 Apr, 2026 03:46 PM

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condom prices hike:  दुनिया के नक्शे पर ईरान और अमेरिका के बीच मची खींचतान का सीधा असर अब भारतीयों के बेडरूम तक पहुंचने वाला है। खाड़ी देशों में छिड़े इस युद्ध ने ग्लोबल सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है, जिसका नतीजा यह है कि आने वाले दिनों में कंडोम की...

condom prices hike:  दुनिया के नक्शे पर ईरान और अमेरिका के बीच मची खींचतान का सीधा असर अब भारतीयों के बेडरूम तक पहुंचने वाला है। खाड़ी देशों में छिड़े इस युद्ध ने ग्लोबल सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है, जिसका नतीजा यह है कि आने वाले दिनों में कंडोम की कीमतें 50% तक उछल सकती हैं। तेल और गैस की महंगाई तो जगजाहिर थी, लेकिन अब गर्भनिरोधकों के कच्चे माल का संकट खड़ा हो गया है।

क्यों अटक गया कंडोम का प्रोडक्शन?
भारत में कंडोम बनाने वाली दिग्गज कंपनियां  इस वक्त दोहरी मार झेल रही हैं। कंडोम बनाने में इस्तेमाल होने वाली एनहाइड्रस अमोनिया के लिए भारत 86% तक सऊदी अरब, कतर और ओमान जैसे देशों पर निर्भर है। हॉर्मुज रूट पर युद्ध के कारण जहाजों का आना-जाना मुश्किल हो गया है, जिससे अमोनिया की सप्लाई ठप है। बिना अमोनिया के लेटेक्स (कच्चा रबड़) जम जाता है और मशीनों में इस्तेमाल के लायक नहीं रहता।

सिर्फ अमोनिया ही नहीं, चीन से आने वाला सिलिकॉन ऑयल (जो लुब्रिकेंट का काम करता है) और पैकेजिंग के लिए जरूरी एल्युमीनियम फॉयल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। कंपनियों के पास ऑर्डर्स तो हैं, लेकिन कच्चा माल न होने से प्रोडक्शन लाइन सुस्त पड़ गई है।

महंगाई का बड़ा खतरा: अनचाहा गर्भ और बीमारियां
विशेषज्ञों का मानना है कि कंडोम की कीमतों में 40 से 50% की यह संभावित बढ़ोतरी सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक खतरा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जानकारों का कहना है कि अगर कीमतें बढ़ीं, तो गरीब तबका गर्भनिरोधकों से दूरी बना सकता है। इसका सीधा नतीजा अनचाहे गर्भ, शिशु और मातृ मृत्यु दर में बढ़ोत्तरी और यौन संचारित रोगों (STIs) के प्रसार के रूप में सामने आ सकता है। इससे सरकार के 'नेशनल फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम' के उन लक्ष्यों को भी धक्का लगेगा, जिन्हें 2030 तक हासिल करना है।

बाजार में 'होल्डिंग' और अन्य चीजों पर असर
युद्ध लंबा खिंचने की आशंका ने बाजार में डर पैदा कर दिया है। कई सप्लायर्स ने कच्चे माल का स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया है, जिससे कीमतें और ज्यादा अस्थिर हो गई हैं। अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो मुमकिन है कि बाजार से आपके पसंदीदा ब्रांड्स कुछ समय के लिए गायब हो जाएं।

युद्ध की यह आंच सिर्फ कंडोम तक सीमित नहीं है। राजधानी दिल्ली के बाजारों में सूखे मेवे (ड्राई फ्रूट्स) पहले ही 50% महंगे हो चुके हैं, जबकि आम आदमी की जरूरत वाली पैरासिटामोल दवा का कच्चा माल भी 47% महंगा हो गया है। सप्लाई चेन की इस टूट-फूट ने आम आदमी की जेब और सेहत दोनों को संकट में डाल दिया है।

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