Edited By Sahil Kumar,Updated: 12 Mar, 2026 03:44 PM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत गुरुवार को 8.2 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। इराक के समुद्री क्षेत्र में दो तेल टैंकरों पर हमले के बाद इराक ने सुरक्षा कारणों से अपने तेल टर्मिनलों पर संचालन रोक दिया है।...
नेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार सुबह अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया और यह 8.2 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इराक के समुद्री क्षेत्र में दो तेल टैंकरों पर हुए हमले और इसके बाद इराक द्वारा अपने तेल टर्मिनलों पर परिचालन बंद करने के फैसले से वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसका असर दुनिया भर के बाजारों पर देखने को मिल रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इराक के समुद्री क्षेत्र में विस्फोटकों से भरी ईरानी नावों ने Safesea Vishnu और Zefyros नाम के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इस घटना के बाद सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए इराक ने अपने सभी तेल टर्मिनलों पर परिचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
IEA के फैसले से बढ़ा तनाव
बताया जा रहा है कि यह हमला इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के उस फैसले की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें एजेंसी ने महंगे होते तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल बाजार में जारी करने का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों को कम करना है। अमेरिका के साथ-साथ जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे कई विकसित देशों ने भी अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का कुछ हिस्सा बाजार में उतारने का फैसला किया है।
ईरान की सख्त चेतावनी
माना जा रहा है कि ईरान तेल की कीमतों में गिरावट नहीं चाहता, क्योंकि इससे अमेरिका और यूरोपीय देशों पर युद्ध समाप्त करने का दबाव कम हो सकता है। इसी पृष्ठभूमि में ईरान ने इराकी टैंकरों पर हमला कर सख्त संदेश दिया है। साथ ही ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके तेल केंद्रों और रिफाइनरियों पर अमेरिका या इजरायल की ओर से हमले जारी रहे, तो वैश्विक तेल कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। ईरान ने यह भी कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिका और इजरायल की ओर तेल की आपूर्ति नहीं होने देगा।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
इस घटनाक्रम का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें मिडिल ईस्ट का बड़ा योगदान है। इराक भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है और भारत अपने कुल आयात का करीब 20 प्रतिशत तेल वहीं से खरीदता है। इराक द्वारा तेल टर्मिनलों पर संचालन रोकने के फैसले से वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव भारत में भी देखने को मिल सकता है।
शेयर बाजार में गिरावट
वैश्विक तेल संकट की आशंका के बीच भारतीय शेयर बाजार में भी दबाव देखने को मिला। गुरुवार को सेंसेक्स में 900 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी लाल निशान में कारोबार करता दिखा।