Edited By Radhika,Updated: 06 Mar, 2026 04:35 PM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालात के बीच कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद अल-काबी ने बहुत चिंताजनक चेतावनी दी है। उनके मुताबिक, अगर यह युद्ध जारी रहा तो आने वाले कुछ हफ्तों में खाड़ी देशों से तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह से रुक सकती है, जिसका...
नेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालात के बीच कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद अल-काबी ने बहुत चिंताजनक चेतावनी दी है। उनके मुताबिक, अगर यह युद्ध जारी रहा तो आने वाले कुछ हफ्तों में खाड़ी देशों से तेल और गैस की सप्लाई पूरी तरह से रुक सकती है, जिसका सीधा असर पूरी दुनिया की इकॉनमी पर पड़ेगा।
इतना महंगा हो सकता है तेल और गैस
एनर्जी मिनिस्टर ने अनुमान लगाया है कि तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इसके अलावा, गैस की कीमतों के भी युद्ध से पहले के लेवल से चार गुना बढ़ने का खतरा है। उन्होंने कहा कि अगर युद्ध अभी खत्म भी हो जाता है, तो भी कतर को सप्लाई के नॉर्मल साइकिल पर लौटने में कई हफ्ते या महीने लग सकते हैं।
ईरानी ड्रोन हमले के बाद कतर ने उठाया बड़ा कदम
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े LNG प्रोड्यूसर कतर को अपने रास लफ्फान प्लांट पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद 'फोर्स मेज्योर' घोषित करना पड़ा है। सुरक्षा कारणों से प्लांट में काम रोक दिया गया है और करीब 9,000 कर्मचारियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। एनर्जी मिनिस्टर ने साफ किया कि जब तक युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता और सेना हरी झंडी नहीं दे देती, तब तक प्रोडक्शन फिर से शुरू नहीं होगा।
होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक रुका
दुनिया का करीब पांचवां हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से सप्लाई होता है, लेकिन अब जहाज का ट्रैफिक लगभग रुक गया है। US और इजरायल के ईरान पर हमला करने के बाद यह इलाका वॉर जोन बन गया है और अब तक कम से कम 10 जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है। कतर के मुताबिक, अब जहाज मालिकों के लिए अपने जहाजों और क्रू को इस खतरनाक रास्ते पर भेजना मुमकिन नहीं है।
इसका असर दुनिया भर में महसूस होगा: आर्थिक मंदी का खतरा: युद्ध जारी रहने से दुनिया भर में GDP ग्रोथ रेट पर बुरा असर पड़ेगा। सामान की कमी: एनर्जी के साथ-साथ फर्टिलाइजर और दूसरे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की सप्लाई भी रुक जाएगी।
बड़े प्रोजेक्ट्स में देरी:
कतर का गैस प्रोडक्शन बढ़ाने का $30 बिलियन का बड़ा प्रोजेक्ट (नॉर्थ फील्ड एक्सपेंशन) भी देरी से चलेगा।