Edited By Mansa Devi,Updated: 05 Mar, 2026 01:04 PM

मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की घोषणा कर दी है।
नेशनल डेस्क: मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की घोषणा कर दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस ट्रांजिट रास्तों में से एक माना जाता है।
भारत के लिए यह रास्ता बेहद अहम है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आने वाले आयात पर निर्भर करता है। अगर इस मार्ग से सप्लाई प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर भारत में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है।
भारत की LPG सप्लाई पर बड़ा असर संभव
भारत अपनी घरेलू जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत एलपीजी अरब देशों से आयात करता है। यह अधिकतर सप्लाई होरमुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही भारत तक पहुंचती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि कच्चे तेल की तरह भारत के पास एलपीजी का बड़ा आपातकालीन भंडार नहीं है। ऐसे में अगर कुछ समय के लिए भी सप्लाई बाधित होती है तो देश में गैस की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की स्थिति बन सकती है।
कतर में उत्पादन रुकने से बढ़ी चिंता
ऊर्जा बाजार में अस्थिरता उस समय और बढ़ गई जब दुनिया के प्रमुख गैस उत्पादक देशों में शामिल कतर ने सुरक्षा कारणों से अपने एक बड़े निर्यात केंद्र पर उत्पादन रोक दिया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी ड्रोन हमलों के बाद यह फैसला लिया गया है।
इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी देखने को मिला है। यूरोप में गैस की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। भारत भी अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलएनजी जरूरत इसी समुद्री मार्ग से पूरी करता है, इसलिए आने वाले समय में गैस आपूर्ति को लेकर चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
पेट्रोल और डीजल को लेकर क्या स्थिति
फिलहाल पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर तत्काल संकट की स्थिति नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
तेल का पर्याप्त भंडार: भारत के पास इस समय करीब 70 से 80 दिनों का कच्चे तेल का भंडार मौजूद है।
नई रणनीति पर काम: हाल ही में भारत ने सऊदी अरब से बड़ी मात्रा में तेल खरीदा है। इसके साथ ही सरकार रूस और अमेरिका जैसे देशों से भी आयात बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही है।
कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका: विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
सरकार ने की आपात बैठक
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने ऊर्जा आपूर्ति की समीक्षा के लिए आपात बैठक बुलाई है। सरकार वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों की तलाश कर रही है, ताकि अगर संकट लंबा चलता है तो भी देश में ऊर्जा की कमी न हो।
आम लोगों के लिए क्या सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। घबराकर गैस की अतिरिक्त बुकिंग न करें, क्योंकि अभी सप्लाई सामान्य है। गैस और ईंधन का समझदारी से उपयोग करें, क्योंकि भविष्य में कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। वैश्विक खबरों पर ध्यान रखें, क्योंकि मध्य-पूर्व की घटनाओं का असर सीधे ऊर्जा बाजार और घरेलू बजट पर पड़ सकता है।