तेल रखने की जगह खत्म! कुवैत ने कई ऑयल फील्ड्स में उत्पादन घटाना शुरू किया, वैश्विक बाजार पर मंडरा सकता है संकट

Edited By Updated: 06 Mar, 2026 10:10 PM

kuwait begins reducing production at several oil fields

मध्य-पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल कुवैत ने अपने कुछ तेल क्षेत्रों में उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है।

इंटरनेशनल डेस्कः मध्य-पूर्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल कुवैत ने अपने कुछ तेल क्षेत्रों में उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि देश के पास कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) स्टोर करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है, जिसके कारण यह कदम उठाना पड़ा। इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक कुवैत में तेल का भंडारण तेजी से भर गया है और अब नई स्टोरेज क्षमता उपलब्ध नहीं है।

कुवैत (OPEC) का संस्थापक सदस्य है। इसलिए उसके उत्पादन में कटौती का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।

सूत्रों के अनुसार कुवैत सरकार अब इस बात पर भी चर्चा कर रही है कि उत्पादन और रिफाइनिंग क्षमता को और कम कर दिया जाए और केवल उतना ही तेल निकाला जाए, जितना देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी है। इस बड़े फैसले पर अगले कुछ दिनों में निर्णय लिया जा सकता है।

स्टोरेज संकट के कारण घटाना पड़ा उत्पादन

ऊर्जा बाजार से जुड़े डेटा उपलब्ध कराने वाली कंपनी Kpler ने भी संकेत दिए हैं कि कुवैत ने कुछ तेल क्षेत्रों में उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। कंपनी के अनुसार यदि उत्पादन को और नहीं घटाया गया तो देश के तेल भंडारण टैंक लगभग 12 दिनों के भीतर पूरी तरह भर सकते हैं। इसलिए आने वाले दिनों में कुवैत को और अधिक उत्पादन घटाना पड़ सकता है।

ऑयल वेल बंद करना आसान फैसला नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी तेल कुएं को बंद करना आम तौर पर आखिरी विकल्प माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उत्पादन बंद करने से तेल भंडार (रिजर्वायर) के दबाव पर असर पड़ सकता है, जिससे भविष्य में उत्पादन करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा तेल उत्पादन दोबारा शुरू करने में भी काफी खर्च और समय लगता है। कई मामलों में तेल कुओं को फिर से चालू करने में कई दिन या कई हफ्ते तक लग सकते हैं।

दोबारा शुरू करने में लगेगा समय

स्विस बैंक UBS के कमोडिटी रणनीतिकार Giovanni Staunovo का कहना है कि जब निर्यात फिर से शुरू करने की अनुमति मिलेगी तब भी उत्पादन तुरंत पहले जैसा नहीं हो पाएगा। उनके मुताबिक तेल कुओं को बंद करने के बाद उन्हें दोबारा पूरी क्षमता पर लाने में समय लगता है, इसलिए निर्यात शुरू होने के बाद भी सप्लाई सामान्य होने में कुछ समय लग सकता है।

वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है असर

कुवैत दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है। ऐसे में यदि उत्पादन में बड़ी कटौती होती है तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्टोरेज संकट गहराता है और उत्पादन में बड़ी कटौती होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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