दिल्ली पुलिस ने मुझे और मेरे परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया : CJP के अभिजीत दिपके

Edited By Updated: 12 Oct, 2026 02:48 PM

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य अभिजीत दिपके ने सोमवार को दिल्ली पुलिस पर "मानसिक प्रताड़ना" के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में हिरासत के दौरान पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को परेशान किया। हिरासत में अपने साथ हुए बर्ताव के...

हिंगोली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य अभिजीत दिपके  ने सोमवार को दिल्ली पुलिस पर "मानसिक प्रताड़ना" के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में हिरासत के दौरान पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को परेशान किया। हिरासत में अपने साथ हुए बर्ताव के खिलाफ बोलते हुए, डिपके ने पुलिस की कार्रवाई को मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी कोशिश बताया।

अभिजीत दिपके ने कहा, आधी रात को दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए डाले गए दबाव को याद करते हुए, डिपके ने अपनी दादी के निधन के बारे में पुलिस के दावों को कबूलनामा हासिल करने के लिए गढ़ा गया "झूठ" करार दिया। "यह सरासर झूठ है! वे बस नैतिक रूप से सही होने का दिखावा कर रहे हैं। वे सुबह 3:30 बजे गिरफ्तारी का कागज लेकर मेरे पास आए और कहा, 'आपकी दादी का निधन हो गया है,  हम नहीं चाहते कि आप यहां रहें, इसलिए इस गिरफ्तारी के कागज पर हस्ताक्षर करें।' 

मैंने उनसे कहा कि मैं हस्ताक्षर नहीं करूंगा। फिर उन्होंने कहा कि मुझे हस्ताक्षर करना ही होगा और मुझे अपने माता-पिता को फोन करना चाहिए। मैंने उनसे पूछा, 'मैं सुबह 3:30 बजे अपने माता-पिता को क्यों फोन करूं?' उन्होंने मुझे पूरे दिन हिरासत में रखा, उन्होंने मुझे नहीं बताया कि मुझे कहां रखा गया था, मैं किस पुलिस स्टेशन में था, या देश के किस हिस्से में था। मुझे नहीं पता था, मेरे माता-पिता को नहीं पता था, और मेरे वकीलों को भी नहीं पता था। उन्होंने पूरे दिन किसी को कुछ नहीं बताया। और सुबह 3:30 बजे, वे जानबूझकर चाहते थे कि मैं अपने माता-पिता को फोन करूं और उन्हें तनाव में डालूं। वे चाहते थे कि मैं उन्हें यह झटका दूं कि मैं लंबे समय तक जेल में रहूंगा। 

दिल्ली पुलिस न केवल मुझे बल्कि मेरे परिवार को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी। क्या दिल्ली पुलिस ने मेरे परिवार को बताया कि मुझे कहां रखा गया था? क्या दिल्ली पुलिस ने मेरे माता-पिता को बताया कि मैं किस जेल या पुलिस स्टेशन में था? अगर उन्होंने नहीं बताया, तो क्यों नहीं बताया? क्या उनमें इंसानियत नहीं है?" ।

अभिजीत ने उन कागज़ों पर साइन करने से इनकार करने के बारे में भी बात की, जिनमें उन पर सार्वजनिक शांति भंग करने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया उन्हें बिना कानूनी सलाह के फंसाने की कोशिश थी।

अभिजीत दिपके ने कहा, "वे मुझसे इस कागज़ पर साइन करने के लिए कह रहे थे और दावा कर रहे थे कि कागज़ में लिखा है कि मैं विरोध-प्रदर्शन करके देश की शांति भंग कर रहा था। मैंने उनसे पूछा, 'आपने मुझे विरोध करने की इजाज़त कब दी? आपने तो मुझे बस प्लेन से उठाया है, मैं इस कागज़ पर साइन नहीं करूंगा।' उन्होंने कहा कि मुझे साइन करना ही होगा। मैंने कहा, 'आप मुझे इस तरह नहीं फंसा सकते। मैं एक पढ़ा-लिखा इंसान हूं; जब तक मेरा वकील नहीं आ जाता, मैं किसी कागज़ पर साइन नहीं करूंगा।'

CJP आंदोलन के संस्थापक ने केंद्र सरकार की आलोचना और तेज़ कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक अधिकारों की कीमत पर कुछ खास अधिकारियों को बचाने के लिए सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

अभिजीत ने कहा, "हम लंबे समय से पुलिस से यह पूछ रहे हैं। वे कहते रहते हैं कि इजाज़त नहीं है। तो आज हमें बताएं कि आप विरोध-प्रदर्शन की इजाज़त कब देंगे। अगर आप आज नहीं बताएंगे, तो हम खुद तारीख तय कर लेंगे, और अगर दिल्ली पुलिस हमें गिरफ्तार करना चाहती है, तो करने दे। मैं पीछे नहीं हटने वाला। अगर आप हमें 10 दिन, एक महीना या एक साल तक भी जेल में रखेंगे, तब भी हम पीछे नहीं हटेंगे। अब बहुत हो गया है, पूरा देश तानाशाही की चपेट में है। सिर्फ़ एक ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए उन्होंने पत्रकारों को गिरफ्तार किया है, छात्रों को हिरासत में लिया है और छात्रों की पिटाई कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी सांसदों की पिटाई की है, कल, सांसद जॉन ब्रिटास की बेरहमी से पिटाई की गई। 

एक ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह गुंडागर्दी पर उतर आए हैं। अगर वे गुंडागर्दी करना चाहते हैं, तो करने दें, लेकिन हम महात्मा गांधी और डॉ. अंबेडकर के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं। उन्होंने देश की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी थी, और हम तानाशाही खत्म करने के लिए लड़ेंगे।"

दिल्ली की एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने CJP के तीन सदस्यों - अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका - को रिहा करने का आदेश दिया। इन तीनों को दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से पहले एहतियातन हिरासत में लिया था। उनके वकील के मुताबिक, रिहाई की शर्त के तौर पर इन तीनों नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे अगले एक साल तक ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल न हों जिससे शांति और व्यवस्था भंग हो सकती है।  

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