शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का पद पर बने रहना लोकतंत्र के लिए कलंक: जयराम रमेश

Edited By Updated: 02 Jul, 2026 03:03 PM

dharmendra pradhan continuing in office is a blot on democracy jairam ramesh

कांग्रेस ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को उसके उद्देश्य के अनुरूप काम करने में अक्षम बताते हुए बुधवार को कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का पद पर बने रहना लोकतंत्र के लिए कलंक है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट कर दावा...

नेशनल डेस्कः कांग्रेस ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को उसके उद्देश्य के अनुरूप काम करने में अक्षम बताते हुए बुधवार को कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का पद पर बने रहना लोकतंत्र के लिए कलंक है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट कर दावा किया कि 21 जून, 2026 को नीट की पुनर्परीक्षा कराने के लिए सशस्त्र बलों और सरकार के हर स्तर की पूरी ताकत लगानी पड़ी।

उन्होंने कहा कि यह इस बात को दर्शाता है कि नरेन्द्र मोदी सरकार इस तरह की अभूतपूर्व लामबंदी के बिना परीक्षा आयोजित कराने में पूरी तरह नाकाम रही। रमेश ने आरोप लगाया कि एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं का रिकॉर्ड अब भी बेहद खराब बना हुआ है।

उन्होंने दावा किया कि यूजीसी-नेट अंग्रेजी परीक्षा के प्रश्न लगभग पूरी तरह बिना किसी बदलाव के पुराने प्रश्नपत्रों से उठाए गए थे, जबकि यूजीसी-नेट समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र में वर्तनी, अनुवाद और व्याकरण संबंधी त्रुटियों की भरमार थी। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एनटीए अपने उद्देश्य के अनुरूप काम करने के योग्य नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन "मंत्री प्रधान" के कार्यकाल में एनटीए में सुधार और उसे मजबूत बनाया जाना था, वह अयोग्य और असंवेदनशील साबित हुए हैं। रमेश ने कहा कि ऐसे मंत्री का पद पर बने रहना लोकतंत्र पर एक 'कलंक' है और यह प्रधानमंत्री के संकीर्ण राजनीतिक जोड़-घटाव को भी दर्शाता है। 

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