Edited By Radhika,Updated: 15 Jan, 2026 12:22 PM

पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच जारी खींचतान अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर है। ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद छापेमारी वाली जगह पहुंचकर जांच में बाधा डाली और...
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नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच जारी खींचतान अब देश की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर है। ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद छापेमारी वाली जगह पहुंचकर जांच में बाधा डाली और महत्वपूर्ण सबूतों को 'जब्त' कर लिया।
सॉलिसिटर जनरल के गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट में ईडी का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने अदालत को बताया कि 8 जनवरी को जब ईडी की टीम आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन के आवास और दफ्तर पर कोयला घोटाले से जुड़ी छापेमारी कर रही थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं। आरोप है कि उन्होंने राज्य पुलिस बल का इस्तेमाल कर जांच अधिकारियों के लैपटॉप, मोबाइल फोन और अहम दस्तावेज जबरन छीन लिए। ईडी ने इसे आधिकारिक तौर पर 'साक्ष्यों की चोरी' करार दिया है।
बड़े पुलिस अधिकारियों को निलंबित करने की मांग
ईडी ने अपनी दलील में कहा कि राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल केंद्रीय एजेंसियों को रोकने के लिए एक 'पैटर्न' की तरह किया जा रहा है। जांच एजेंसी ने अदालत से मांग की है कि पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा को तुरंत निलंबित किया जाए। इन अधिकारियों के खिलाफ जांच में बाधा डालने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के आरोप में FIR दर्ज हो।
दूसरी ओर ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 'केविएट' दाखिल की है, ताकि उनका पक्ष सुने बिना कोई एकतरफा आदेश पारित न हो। मुख्यमंत्री का कहना है कि ईडी उनकी पार्टी की चुनावी रणनीतियों और डेटा को चुराने की कोशिश कर रही थी, जिसे रोकना उनका अधिकार है