Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 02 Mar, 2026 06:19 PM

पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि 2026 के विधानसभा चुनाव में वे दोबारा भवानीपुर सीट से ही चुनाव लड़ेंगी। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में हजारों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिसे उन्होंने पक्षपातपूर्ण और बदले की कार्रवाई बताया।
भवानीपुर में हजारों नाम कटने का दावा
भवानीपुर सीट को ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता है। विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।मुख्यमंत्री के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 47 हजार से अधिक नाम हटाए गए हैं। कुछ नाम अभी भी "अंडर एडजुडिकेशन" की श्रेणी में हैं, जिनकी जांच जारी है। ममता बनर्जी ने कहा कि वे हर हाल में इसी सीट से चुनाव लड़ेंगी और “एक वोट से भी जीत” दर्ज करेंगी। उन्होंने इसे लोकतंत्र से जुड़ा मुद्दा बताते हुए विरोध प्रदर्शन की घोषणा भी की।
चुनाव आयोग पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट जाने का संकेत
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और कई वैध मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जाएगा।
2021 का संदर्भ और राजनीतिक समीकरण
2021 के विधानसभा चुनाव में Suvendu Adhikari से नंदीग्राम सीट पर हार के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव में बड़ी जीत दर्ज की थी। अब 2026 के चुनाव से पहले एक बार फिर भवानीपुर सीट चर्चा के केंद्र में है। विपक्षी दल Bharatiya Janata Party (BJP) ने इस मुद्दे पर पलटवार करते हुए कहा है कि मतदाता सूची संशोधन नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
धरना और सियासी तापमान
मुख्यमंत्री ने कोलकाता में धरना देने की घोषणा की है और जनता से समर्थन की अपील की है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।