Edited By Radhika,Updated: 29 Jan, 2026 06:11 PM

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने वीरवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा UGC के नए नियमों पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया। परसपुर में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे पूर्व सांसद ने कहा कि नियमों पर रोक लगाकर उच्चतम न्यायालय ने अच्छा काम किया है।...
नेशनल डेस्क: पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने वीरवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा UGC के नए नियमों पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया। परसपुर में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे पूर्व सांसद ने कहा कि नियमों पर रोक लगाकर उच्चतम न्यायालय ने अच्छा काम किया है। अदालत के फैसले पर बृजभूषण सिंह के सांसद बेटे करण भूषण सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसे समाज में एकता लाने की दिशा में मील का पत्थर बताया और न्यायालय का आभार जताया। इससे पहले सांसद ने स्पष्ट किया था कि वह नए नियमों पर निर्णय लेने वाली समिति का हिस्सा नहीं थे। यह स्पष्टीकरण उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने के बाद दिया था।
गोंडा सदर से भाजपा विधायक और करण भूषण सिंह के बड़े भाई प्रतीक भूषण सिंह ने भी फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यूजीसी के नए नियमों पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगाई है। उन्होंने कहा कि जाति से जुड़े नियम अस्पष्ट हैं और उनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। इससे पूर्व, बृजभूषण शरण सिंह ने इस कानून को समाज में कटुता पैदा करने वाला बताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की थी। उच्चतम न्यायालय ने यूजीसी के हालिया नियमों के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी। इन याचिकाओं में दलील दी गई थी कि आयोग ने जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है।
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प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने विनियमन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए। उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए सभी संस्थानों द्वारा ‘‘समानता समितियां'' गठित करने को अनिवार्य बनाने संबंधी नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे।