Edited By Tanuja,Updated: 19 Mar, 2026 11:33 AM

ईरान-इजराइल संघर्ष अब खाड़ी देशों तक फैल गया है। Donald Trump ने चेतावनी दी कि कतर पर दोबारा हमला हुआ तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करेगा। ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से तेल कीमतें उछलीं, जबकि क्षेत्र में युद्ध का खतरा और गहरा गया है।
International Desk: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने कतर पर दोबारा हमला किया, तो अमेरिका सीधे जवाबी कार्रवाई करेगा और पूरे क्षेत्र को तबाह करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह बड़े स्तर की तबाही नहीं चाहते, क्योंकि इससे ईरान के भविष्य पर गंभीर असर पड़ेगा। लेकिन कतर के LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) ठिकानों पर हमला हुआ तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। इस पूरे विवाद की जड़ बना ईरान का सबसे बड़ा गैस क्षेत्र South Pars Gas Field, जिस पर इजराइल ने हमला किया। यह क्षेत्र ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस हमले के बाद ईरान ने खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
ईरान ने कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के गैस और तेल ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। कतर के Ras Laffan Industrial City में मिसाइल गिरने से आग लग गई और भारी नुकसान हुआ। इसके बाद कतर ने ईरानी राजनयिकों को 24 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दे दिया। संयुक्त अरब अमीरात के हबशान गैस प्लांट और बाब क्षेत्र को भी निशाना बनाया गया। हालांकि इन जगहों पर पहले ही उत्पादन रोक दिया गया था। इस बीच इजराइल ने दावा किया कि उसके हमले में ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातीब मारे गए। इससे पहले ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारीजानी और बासिज बल के प्रमुख जनरल गुलाम रजा सुलेमानी भी मारे जा चुके हैं। जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइल हमले किए, जिनमें पश्चिमी तट पर कई लोगों की मौत हुई।
तनाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। Strait of Hormuz पर खतरे के कारण तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत युद्ध शुरू होने के बाद लगभग 50% बढ़ चुकी है। अमेरिका अब तेल सप्लाई बढ़ाने के विकल्प तलाश रहा है और उसने वेनेजुएला पर लगे कुछ प्रतिबंध भी हटा दिए हैं, ताकि वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ाई जा सके।खाड़ी के देश फिलहाल हमलों को झेल रहे हैं, लेकिन उन्होंने ईरान के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं की है। इससे साफ है कि पूरा क्षेत्र एक बड़े युद्ध के कगार पर खड़ा है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
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