Edited By Parveen Kumar,Updated: 23 Jan, 2026 07:57 PM

गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को तेज गिरावट दर्ज की गई। इस अचानक आई कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन का कम होना माना जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा...
नेशनल डेस्क: गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को तेज गिरावट दर्ज की गई। इस अचानक आई कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन का कम होना माना जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर किसी भी सैन्य कार्रवाई से इनकार किए जाने के बाद वैश्विक तनाव घटा, जिससे सेफ-हेवन यानी सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर पड़ गई।
क्यों आई कीमतों में गिरावट?
आनंद राठी शेयर्स की तान्वी कंचन के मुताबिक, हाल के दिनों में चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। ट्रंप के बयान के बाद तनाव कम हुआ, जिससे निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी। इसका सीधा असर गोल्ड और सिल्वर ETF पर पड़ा और कीमतों में करेक्शन देखने को मिला। मास्टर कैपिटल के रवि सिंह का भी कहना है कि प्रॉफिट बुकिंग के चलते ETF में गिरावट आई है।
नुकसान NAV से नहीं, प्रीमियम से ज्यादा हुआ
विशेषज्ञों के अनुसार कई गोल्ड और सिल्वर ETF पिछले कुछ हफ्तों से अपने NAV यानी असली वैल्यू से काफी ज्यादा प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे थे। रिद्धिसिद्धि बुलियन के एमडी पृथ्वीराज कोठारी बताते हैं कि जैसे ही यह अतिरिक्त प्रीमियम खत्म हुआ, कीमतों में तेज गिरावट दिखी। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ETF का NAV ₹100 था और वह ₹125 पर ट्रेड कर रहा था, तो कीमत ₹102 पर आने पर निवेशक को करीब 18% का नुकसान नजर आएगा, जबकि असली वैल्यू में गिरावट सिर्फ 2% की होती है।
अब निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
विशेषज्ञ घबराकर बिकवाली से बचने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि एकमुश्त निवेश की बजाय SIP या चरणबद्ध निवेश बेहतर विकल्प हो सकता है। साथ ही ऐसे ETF चुनने चाहिए जिनका प्रीमियम कम हो और ट्रैकिंग एरर भी न्यूनतम हो। सोना और चांदी को शॉर्ट टर्म मुनाफे के बजाय लॉन्ग टर्म सुरक्षा और पोर्टफोलियो बैलेंस के तौर पर देखना ज्यादा समझदारी होगी।