Edited By jyoti choudhary,Updated: 20 Feb, 2026 11:57 AM

सोना और चांदी एक बार फिर निवेशकों के फोकस में आ गए हैं। ताजा आउटलुक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों कीमती धातुएं मजबूत बुल मार्केट में हैं और आने वाले समय में कीमतें नई ऐतिहासिक ऊंचाई छू सकती हैं। हालांकि, रिपोर्ट ने साथ ही आगाह किया है कि इस...
बिजनेस डेस्कः सोना और चांदी एक बार फिर निवेशकों के फोकस में आ गए हैं। ताजा आउटलुक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों कीमती धातुएं मजबूत बुल मार्केट में हैं और आने वाले समय में कीमतें नई ऐतिहासिक ऊंचाई छू सकती हैं। हालांकि, रिपोर्ट ने साथ ही आगाह किया है कि इस तेजी के बीच 20 से 30 फीसदी तक की तेज गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
क्या कहती है रिपोर्ट?
इन्वेस्टमेंट फर्म AuAg Funds की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड इस साल 6,000 डॉलर प्रति औंस के पार जा सकता है, जबकि सिल्वर 133 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट में बताया गया कि हाल ही में गोल्ड ने 5,600 डॉलर के करीब हाई बनाया था लेकिन इसके बाद लगभग 20% की गिरावट दर्ज हुई और कीमतें 4,400 डॉलर के आसपास सपोर्ट लेने के बाद अब 5,000 डॉलर के करीब स्थिर दिखाई दे रही हैं।
बुल मार्केट में गिरावट क्यों आम है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, लंबी अवधि के बुल मार्केट में इस तरह के तेज करेक्शन सामान्य होते हैं। कई बार बाजार में अचानक गिरावट इसलिए भी आती है ताकि कमजोर निवेशक बाहर हो जाएं और बड़े निवेशक कम दाम पर दोबारा खरीदारी कर सकें।
तेजी के पीछे क्या वजह?
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक कर्ज तेजी से बढ़कर लगभग 350 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है। आने वाले समय में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती और नई क्वांटिटेटिव ईजिंग नीतियां अपना सकते हैं।
इससे करेंसी सप्लाई बढ़ने और डॉलर पर दबाव बनने की संभावना है, जो गोल्ड के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करता है। अब गोल्ड को केवल कीमती धातु नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक ग्लोबल करेंसी के रूप में भी देखा जा रहा है।
सिल्वर पर और ज्यादा बुलिश नजरिया
रिपोर्ट में सिल्वर को लेकर आउटलुक और ज्यादा मजबूत बताया गया है। इसकी मांग सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल मेटल भी है। कई वर्षों से सप्लाई डिमांड से कम बनी हुई है। यदि फिजिकल कमी और बढ़ती है तो कीमतों में तेज उछाल संभव है।
माइनिंग शेयरों में भी मौका
रिपोर्ट के मुताबिक गोल्ड और सिल्वर माइनिंग कंपनियों के शेयर अभी तक पूरी तरह ऊंचे मेटल प्राइस को अपने वैल्यूएशन में शामिल नहीं कर पाए हैं। यदि धातुओं में तेजी जारी रहती है तो माइनिंग स्टॉक्स में ज्यादा तेज रैली देखने को मिल सकती है।