Edited By Sahil Kumar,Updated: 21 Mar, 2026 01:16 PM

पश्चिम एशिया में तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोना-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना साप्ताहिक आधार पर करीब 9.6% टूटा, जबकि चांदी 14% से ज्यादा गिर गई। भारतीय बाजार में भी सोना 8.57% लुढ़का। विशेषज्ञों के मुताबिक...
नेशनल डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच वैश्विक बाजारों में सोना और चांदी भारी दबाव में आ गए हैं। शुक्रवार को दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है, खासकर ऐसे समय में जब भारत में शादी का सीजन नजदीक है। पूरे सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में लगभग 9.6 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो सितंबर 2011 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। यानी इस हफ्ते सोने में नरमी करीब 15 साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।
15 साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो गोल्ड फ्यूचर्स में 0.7 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 4,574.90 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। पूरे सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में लगभग 9.6 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो सितंबर 2011 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। यानी इस हफ्ते सोने में नरमी करीब 15 साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। वहीं चांदी भी इससे अछूती नहीं रही और सिल्वर फ्यूचर्स 2 प्रतिशत से अधिक टूटकर 69.66 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट के चलते चांदी में कुल मिलाकर 14 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी देखी गई है।
सोने की कीमतों में 8.57 प्रतिशत की गिरावट
वैश्विक दबाव का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्स चेंज (MCX) पर 20 मार्च को सोना 144,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में करीब 8.57 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मार्च 2000 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में शामिल है।
गिरावट के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। वैश्विक स्तर पर निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर बिकवाली, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, और आर्थिक अनिश्चितता ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और ब्याज दरों में कटौती में संभावित देरी ने भी सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश को कम आकर्षक बना दिया है। मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने भी कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लॉन्ग पोजिशन में बिकवाली और मार्जिन कॉल के चलते गिरावट और तेज हुई है, जिससे तकनीकी कारणों ने भी इसमें भूमिका निभाई है। यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो आने वाले समय में सोने की कीमतों में और गिरावट देखी जा सकती है। अनुमान है कि भारत में सोना 1,27,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसल सकता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह 4,250 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है।