Edited By Rohini Oberoi,Updated: 08 May, 2026 11:35 AM

राजस्थान के जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल में चिकित्सा जगत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहां डॉक्टरों ने एक 66 वर्षीय बुजुर्ग महिला के उस पैर का ऑपरेशन कर दिया जिसमें तकलीफ ही नहीं थी। मामला तूल पकड़ने के बाद अस्पताल...
Wrong Leg Surgery Jodhpur : राजस्थान के जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल में चिकित्सा जगत को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहां डॉक्टरों ने एक 66 वर्षीय बुजुर्ग महिला के उस पैर का ऑपरेशन कर दिया जिसमें तकलीफ ही नहीं थी। मामला तूल पकड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए जिम्मेदार डॉक्टर को कार्यमुक्त कर दिया है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
एक 66 वर्षीय महिला मरीज को पैर में फ्रैक्चर की शिकायत के बाद अस्पताल के आर्थोपेडिक (हड्डी) विभाग में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों ने महिला के स्वस्थ पैर का ऑपरेशन कर दिया जबकि दूसरे पैर में फ्रैक्चर था। वहीं अस्पताल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया। जिसके बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि ऑपरेशन के दौरान SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) का पालन नहीं किया गया और यह गंभीर मानवीय चूक का मामला है।
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डॉक्टर को किया गया कार्यमुक्त
जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। आर्थोपेडिक विभाग के सहआचार्य (Associate Professor) डॉ. रामाकिशन चौधरी को तत्काल प्रभाव से मेडिकल कॉलेज से कार्यमुक्त (Relieve) कर दिया गया है। उन्हें अब रिपोर्ट करने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग (जयपुर) भेज दिया गया है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में अन्य स्टाफ के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
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डॉक्टर का दावा - दोनों पैरों में था फ्रैक्चर
वहीं, दूसरी ओर आरोपी डॉक्टर रामाकिशन चौधरी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका तर्क है कि महिला के एक नहीं बल्कि दोनों पैरों में फ्रैक्चर था। मेडिकल प्लानिंग के तहत दोनों का ऑपरेशन किया जाना तय था। पहले जिस पैर का ऑपरेशन जरूरी था उसे ही किया गया है। हालांकि जांच कमेटी डॉक्टर के इस तर्क से सहमत नहीं दिखी और इसे प्रोटोकॉल की बड़ी अनदेखी माना है।
फिलहाल इस घटना के बाद पीड़ित बुजुर्ग महिला के परिजन सदमे में हैं और उन्होंने इसे डॉक्टर की भारी लापरवाही बताया है। अस्पताल में हंगामे की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है।