Edited By Parveen Kumar,Updated: 01 Feb, 2026 06:27 PM

अब यूनियन बजट का मतलब सिर्फ टैक्स स्लैब, सरकारी खर्च और लंबा भाषण नहीं रह गया है। जैसे ही बजट 2026 पेश हुआ, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रिएक्शन की बाढ़ आ गई। वित्त मंत्री का भाषण शुरू होने से पहले ही X और इंस्टाग्राम पर मीम्स ट्रेंड करने लगे। इन...
नेशनल डेस्क : अब यूनियन बजट का मतलब सिर्फ टैक्स स्लैब, सरकारी खर्च और लंबा भाषण नहीं रह गया है। जैसे ही बजट 2026 पेश हुआ, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रिएक्शन की बाढ़ आ गई। वित्त मंत्री का भाषण शुरू होने से पहले ही X और इंस्टाग्राम पर मीम्स ट्रेंड करने लगे। इन मीम्स में मिडिल क्लास की बेचैनी, निवेशकों की उम्मीदें और आम लोगों का डर साफ झलकता दिखा। बजट डे एक बार फिर यह साबित कर गया कि भारत में अब बड़े आर्थिक फैसलों को लोग पहले मीम्स में तोलते हैं, फिर असली असर समझते हैं।
भाषण से ज़्यादा वायरल हुए बजट मीम्स
इस बार बजट की चर्चा भाषण से ज्यादा सोशल मीडिया कंटेंट की वजह से रही। कई यूजर्स पहले से तैयार बैठे थे. कुछ ने तो बजट पेश होने से पहले ही अपने रिएक्शन पोस्ट कर दिए। एक वायरल मीम में लिखा गया “मिडिल क्लास टैक्स राहत का इंतजार करता रहा।” इस लाइन ने सैलरीड क्लास की भावना को तुरंत पकड़ लिया और पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई।
‘छुट्टी भी गई, राहत भी नहीं’ वाला दर्द
कई यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि मिडिल क्लास को न तो बजट में कुछ मिला और न ही चैन से छुट्टी नसीब हुई। किसी ने कहा- ऑफिस से मुश्किल से मिली छुट्टी बजट देखने में ही निकल गई। कुछ पोस्ट्स में यह भी लिखा गया कि संडे भी बिना किसी फायदे के चला गया। इन मीम्स ने नौकरीपेशा लोगों के उस गुस्से और थकान को आवाज दी, जिसे वो अक्सर शब्दों में नहीं कह पाते।


टैक्स पर चुप्पी, मीम्स में शोर
मिडिल क्लास की नजरें पूरे भाषण के दौरान सिर्फ एक चीज पर टिकी थीं- इनकम टैक्स में राहत। लेकिन जैसे-जैसे भाषण आगे बढ़ा और पर्सनल टैक्स को लेकर कोई बड़ा ऐलान नहीं हुआ, निराशा मीम्स में बदलने लगी। कुछ ही मिनटों में X और इंस्टाग्राम मजेदार पोस्ट्स से भर गए। कई मीम्स में हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ के सीन का इस्तेमाल किया गया, जहां उम्मीद, ड्रामा और अंत में खाली हाथ रह जाने की कहानी को मजेदार अंदाज में दिखाया गया।


पॉलिसी की बात, लेकिन मीम्स का असर ज्यादा
बजट में सरकार ने अपनी आर्थिक दिशा को तीन प्रमुख कर्तव्यों के जरिए सामने रखा। हेल्थकेयर और बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग इस बार खास फोकस में रहे। अगले पांच सालों में इन सेक्टर्स पर 10,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि भारत को बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स का ग्लोबल सेंटर बनाया जा सके। हालांकि ये योजनाएं कागज पर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई दिखीं, लेकिन आम लोगों की रोजमर्रा की चिंता मीम्स में ज्यादा झलकती रही।
उम्मीदें बहुत, बदलाव कम- मीम्स ने कही दिल की बात
कई मीम्स में मिडिल क्लास की लगातार चल रही जद्दोजहद को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाया गया। कुछ यूजर्स ने बजट की तुलना ऐसी कहानी से की, जिसमें अंत तक बड़े ट्विस्ट की उम्मीद रहती है, लेकिन आखिर में सब वैसा ही रह जाता है। महंगाई, टैक्स और राहत की कमी- इन तमाम मुद्दों को लोगों ने पॉप-कल्चर और फनी रेफरेंस के जरिए सोशल मीडिया पर उतार दिया।