Edited By Radhika,Updated: 30 Jan, 2026 05:49 PM

भारत की अदालतों में न्याय देने वाले जज किस पृष्ठभूमि से आते हैं? इस पुराने सवाल का जवाब अब संसद में पेश आंकड़ों ने दे दिया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार देश की जिला और अधीनस्थ अदालतों में...
SC, ST, OBC judges: भारत की अदालतों में न्याय देने वाले जज किस पृष्ठभूमि से आते हैं? इस पुराने सवाल का जवाब अब संसद में पेश आंकड़ों ने दे दिया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार देश की जिला और अधीनस्थ अदालतों में कार्यरत कुल 20,833 जजों में से 9,534 जज (लगभग 46%) अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से ताल्लुक रखते हैं।
तमिलनाडु और मेघालय से आई चौंकाने वाली तस्वीर
आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली और सुखद तस्वीर तमिलनाडु से आई है। यहाँ की निचली अदालतों में 97.6% जज आरक्षित वर्गों से हैं (1,234 में से 1,205)। वहीं, पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में यह आंकड़ा 95% है, जो वहां की जनजातीय आबादी के मजबूत प्रतिनिधित्व को दर्शाता है। कर्नाटक (88%) और पुडुचेरी (88.5%) भी इस फेहरिस्त में काफी ऊपर हैं।

दिल्ली और हरियाणा में भागीदारी कम
रिपोर्ट के मुताबिक जहाँ दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में आरक्षित वर्गों की भागीदारी मजबूत है। वहीं उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में यह तस्वीर थोड़ी अलग है। दिल्ली में केवल 13% (837 में से 108) जज ही इन वर्गों से हैं। गुजरात में यह आंकड़ा 29% और हरियाणा में 31% के करीब है। हिंदी पट्टी की बात करें तो उत्तर प्रदेश 54% के साथ काफी संतुलित स्थिति में है।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में स्थिति अलग क्यों?
कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, 2018 से एक नई व्यवस्था शुरू की गई है जिसके तहत हाईकोर्ट जज के लिए सिफारिश किए गए उम्मीदवारों को अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि की जानकारी देनी होती है।

2018 से अब तक का डेटा:
हाईकोर्ट में कुल नियुक्तियां: 847
- SC वर्ग से: 33
- ST वर्ग से: 17
- OBC वर्ग से: 104
- महिलाएं: 130 (लैंगिक समानता की ओर बढ़ते कदम)