UPI यूजर्स सावधान! फ्री पेमेंट का दौर हो सकता है खत्म, बजट 2026 से पहले सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

Edited By Updated: 19 Jan, 2026 08:02 PM

the era of free payments may be over a shocking truth has emerged ahead

भारत में डिजिटल पेमेंट का दौर तेजी से बढ़ रहा है। आज एक कप चाय, किराया, बिजली बिल या मोबाइल रिचार्ज तक, लोग UPI (Unified Payments Interface) के जरिए भुगतान कर रहे हैं। QR कोड अब सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि एक नई आजादी का प्रतीक बन चुका है।

नेशनल डेस्क: भारत में डिजिटल पेमेंट का दौर तेजी से बढ़ रहा है। आज एक कप चाय, किराया, बिजली बिल या मोबाइल रिचार्ज तक, लोग UPI (Unified Payments Interface) के जरिए भुगतान कर रहे हैं। QR कोड अब सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि एक नई आजादी का प्रतीक बन चुका है। लेकिन बजट 2026 से पहले सामने आई नई जानकारी से साफ हो गया है कि यह फ्री डिजिटल पेमेंट मॉडल हमेशा कायम नहीं रह सकता।

UPI का दबदबा, लेकिन चुनौतियां भी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन के तहत UPI ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट मार्केट बना दिया है। देश में डिजिटल लेनदेन का लगभग 85% हिस्सा UPI के माध्यम से होता है। अक्टूबर 2025 में ही UPI के जरिए 20 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन और 27 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ।

फिर भी आंकड़े बताते हैं कि चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। सिर्फ 45% व्यापारी नियमित तौर पर UPI स्वीकार करते हैं, और देश के कई पिनकोड में 100 से भी कम सक्रिय UPI मर्चेंट हैं। इस तरह, बड़े पैमाने पर डिजिटल लेनदेन की संभावना अभी अधूरी है।

फ्री UPI की असली कीमत
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, UPI पर जीरो MDR (Merchant Discount Rate) लागू है, यानी दुकानदार से कोई फीस नहीं ली जाती। यह कदम छोटे लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया था। लेकिन हर UPI ट्रांजैक्शन की लागत लगभग 2 रुपये आती है, जो अभी बैंक और फिनटेक कंपनियों की जेब से पूरी होती है। PhonePe, PCI और RBI ने भी माना है कि यह मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ने डिजिटल पेमेंट्स के लिए 3900 करोड़ रुपये खर्च किए थे, लेकिन 2025-26 में यह घटकर सिर्फ 427 करोड़ रुपये रह गए। वहीं, अगले दो साल में UPI सिस्टम का संचालन 8000 से 10,000 करोड़ रुपये तक खर्चीला हो सकता है।


RBI की चेतावनी और इंडस्ट्री की मांग
RBI गवर्नर ने स्पष्ट किया है कि UPI हमेशा मुफ्त नहीं रह सकता। संचालन खर्च किसी न किसी को उठाना ही पड़ेगा। भुगतान कंपनियां भी कह रही हैं कि पैसे की कमी से गांवों में UPI पहुंचाना, सिस्टम सुरक्षा मजबूत करना और नए फीचर्स लाना मुश्किल हो रहा है।

इसी वजह से इंडस्ट्री ने एक बीच का रास्ता सुझाया है। प्रस्ताव यह है कि: छोटे दुकानदार और P2P (व्यक्ति से व्यक्ति) लेनदेन मुफ्त जारी रहे। जिन बड़े कारोबारी का सालाना टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से अधिक हो, उनसे हर ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.30% तक मामूली फीस ली जाए।


बजट 2026: UPI के लिए टर्निंग पॉइंट
बजट 2026 UPI के भविष्य का निर्णायक मोड़ हो सकता है। या तो सरकार इसे भारी सब्सिडी देकर पूरी तरह फ्री रखेगी, या फिर सीमित MDR के जरिए इसे आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाएगी। एक बात तय है, डिजिटल भुगतान का दौर समाप्त नहीं होने वाला, लेकिन इसके मॉडल में बड़े बदलाव की तैयारी अब शुरू हो गई है।

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