Ramadan 2026: इबादत और बरकतों का महीना शुरू! सऊदी अरब में पहला रोज़ा आज, भारत में कल से सजेगा दस्तरखान

Edited By Updated: 18 Feb, 2026 10:27 AM

hilal e eid observed in saudi arabia the sound of azaan echoed

दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों के लिए सबसे मुकद्दस (पवित्र) महीना रमजान-उल-मुबारक शुरू हो चुका है। सऊदी अरब में मंगलवार शाम को चांद का दीदार होने के बाद आज 18 फरवरी 2026 को वहां पहला रोज़ा रखा जा रहा है। मक्का और मदीना की पवित्र मस्जिदों में कल रात से...

Ramadan 2026 Start Date : दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों के लिए सबसे मुकद्दस (पवित्र) महीना रमजान-उल-मुबारक शुरू हो चुका है। सऊदी अरब में मंगलवार शाम को चांद का दीदार होने के बाद आज 18 फरवरी 2026 को वहां पहला रोज़ा रखा जा रहा है। मक्का और मदीना की पवित्र मस्जिदों में कल रात से ही विशेष नमाज़ तरावीह का सिलसिला शुरू हो गया है। आमतौर पर भारत और खाड़ी देशों के बीच चांद दिखने में एक दिन का अंतर होता है। ऐसे में अगर आज शाम भारत में चांद नजर आता है तो देश भर में 19 फरवरी को पहला रोज़ा रखा जाएगा।

क्या है रोज़ा और इसकी अहमियत?

रोज़ा इस्लाम के पांच बुनियादी स्तंभों में से एक है। यह केवल सुबह से शाम तक भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है बल्कि यह आत्मा की शुद्धि और आत्मसंयम का मार्ग है।

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रोज़े की प्रक्रिया:

  • सहरी: सूरज निकलने से पहले किया जाने वाला भोजन जो दिन भर के उपवास के लिए ऊर्जा देता है।

  • इफ्तार: सूर्यास्त के समय खजूर और पानी के साथ रोज़ा खोलने की रस्म।

रमजान के सुनहरे नियम: इबादत और अनुशासन

पाक महीने के दौरान हर मुसलमान को कुछ नियमों का कड़ाई से पालन करना होता है:

  1. पूर्ण उपवास: सूर्योदय (फज्र) से सूर्यास्त (मगरिब) तक पानी की एक बूंद भी पीना वर्जित है।

  2. नमाज़ और तरावीह: पांच वक्त की फर्ज नमाज़ के अलावा रात में तरावीह पढ़ना सुन्नत और बेहद सवाब (पुण्य) का काम है।

  3. आचरण की शुद्धि: रोज़े की हालत में झूठ बोलना, चुगली करना, गुस्सा करना या किसी का दिल दुखाना सख्त मना है।

  4. दान का महत्व: इस महीने में जकात (अपनी आय का हिस्सा दान करना) और सदका देने से गरीबों की मदद होती है और सवाब कई गुना बढ़ जाता है।

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क्यों खास है यह महीना?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी पाक महीने में अल्लाह ने पवित्र कुरान शरीफ को जमीन पर उतारा था। रमजान को सब्र (धैर्य) का महीना भी कहा जाता है। यह इंसान को सिखाता है कि भूख और प्यास का एहसास क्या होता है जिससे मन में गरीबों के प्रति हमदर्दी पैदा होती है।

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सेहत और मन को मिलते हैं ये लाभ:

  • डिटॉक्सिफिकेशन: वैज्ञानिक रूप से भी रोज़ा रखने से शरीर के जहरीले तत्व बाहर निकलते हैं और पाचन तंत्र को आराम मिलता है।

  • मानसिक शांति: इबादत और अनुशासन से तनाव कम होता है और मन में सकारात्मकता आती है।

  • धैर्य का विकास: दिन भर की भूख-प्यास इंसान में सहनशक्ति और अनुशासन पैदा करती है।

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