Edited By Radhika,Updated: 17 Feb, 2026 03:25 PM

साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण होली के उल्लास के बीच लगने जा रहा है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार इस बार फाल्गुन पूर्णिमा पर ग्रहण का साया होने के कारण रंगों की होली की तारीख में बदलाव किया गया है। जहाँ होलिका दहन 3 मार्च को होगा, वहीं रंगों से होली 4 मार्च...
Chandra grahan 2026: साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण होली के उल्लास के बीच लगने जा रहा है। खगोलीय गणनाओं के अनुसार इस बार फाल्गुन पूर्णिमा पर ग्रहण का साया होने के कारण रंगों की होली की तारीख में बदलाव किया गया है। जहाँ होलिका दहन 3 मार्च को होगा, वहीं रंगों से होली 4 मार्च को खेली जाएगी। साथ ही आपको बता दें कि 3 मार्च को इस साल का पहला चंद्रग्रहण लगने जा रहा है।
होलिका दहन और ग्रहण का संयोग
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 3 मार्च 2026 को ही साल का पहला चंद्रग्रहण लग रहा है। यह ग्रहण भारत के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से दिखाई देगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान और उसके सूतक काल में किसी भी प्रकार का उत्सव या रंग खेलना वर्जित होता है। यही कारण है कि 3 मार्च नहीं 4 मार्च को रंगों से होली खेली जाएगी।

ग्रहण और सूतक का समय (भारतीय समयानुसार):
- ग्रहण का प्रारंभ: 3 मार्च, दोपहर 03:20 बजे से
- ग्रहण की समाप्ति: 3 मार्च, शाम 06:47 बजे
- सूतक काल: ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले यानी सुबह 06:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा।
क्या होता है खग्रास चंद्रग्रहण?
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच इस तरह आती है कि चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में छिप जाता है, तो उसे खग्रास या पूर्ण चंद्रग्रहण कहते हैं। हालांकि, भारत में इस बार चंद्रमा उदय होने के समय ग्रहण अपने अंतिम चरण में होगा, इसलिए यहाँ केवल इसका 'मोक्ष' (समाप्ति) काल ही मुख्य रूप से दिखेगा।
क्या खुले रहेंगे मंदिर?
सूतक काल शुरू होते ही सुबह से मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। ग्रहण समाप्त होने और शुद्धिकरण के बाद ही शाम को मंदिरों में पूजा-अर्चना और होलिका दहन की रस्में पूरी की जाएंगी।