Edited By Ramanjot,Updated: 13 Feb, 2026 05:50 PM

सनातन परंपरा में ग्रहण को विशेष समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान सूर्य या चंद्रमा पर राहु-केतु का प्रभाव बढ़ता है, इसलिए पूजा-पाठ और सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
नेशनल डेस्क: सनातन परंपरा में ग्रहण को विशेष समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान सूर्य या चंद्रमा पर राहु-केतु का प्रभाव बढ़ता है, इसलिए पूजा-पाठ और सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। वर्ष 2026 में कुल चार ग्रहण पड़ेंगे—दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण। इनमें पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में ही लगने वाला है, जिसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
2026 में कब-कब लगेंगे प्रमुख ग्रहण?
पहला सूर्य ग्रहण – 17 फरवरी 2026 (मंगलवार)
यह वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण फाल्गुन अमावस्या को लगेगा। इस दौरान चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेता है और चारों ओर आग की अंगूठी जैसी आकृति दिखती है, जिसे “Ring of Fire” कहा जाता है। भारत में यह ग्रहण दृश्यमान नहीं होगा। इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। यह दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों और अंटार्कटिका में दिखाई देगा।
पहला चंद्र ग्रहण – 3 मार्च 2026 (मंगलवार)
यह पूर्ण (Total) चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगेगा, जो होलिका दहन के आसपास पड़ रहा है। भारत के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में यह आंशिक या पूर्ण रूप से दिखाई दे सकता है। इसलिए यहां सूतक काल लागू होगा। चंद्र ग्रहण का सूतक सामान्यत 9 घंटे पहले से शुरू माना जाता है।
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण – 12 अगस्त 2026
यह भी भारत में दिखाई नहीं देगा। साल में कुल दो चंद्र ग्रहण भी होंगे, जिनकी विस्तृत जानकारी पंचांग के अनुसार अलग-अलग क्षेत्र में भिन्न हो सकती है।
एक महीने में दो ग्रहण: ज्योतिष में क्या माना जाता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों का निकट समय में पड़ना विशेष योग बनाता है। परंपरागत मान्यताओं में इसे संवेदनशील समय माना गया है। कुछ मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में आर्थिक बाजारों में अस्थिरता,प्राकृतिक आपदाओं की आशंका,राजनीतिक हलचल और सामाजिक असंतोष
जैसी स्थितियों की चर्चा की जाती है। हालांकि, इन बातों को धार्मिक-ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाता है; वैज्ञानिक रूप से ग्रहण एक खगोलीय घटना है।
ग्रहण काल में क्या करें, क्या न करें?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ध्यान,दान-पुण्य, स्नान और पूजा और सात्विक भोजन से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने की सलाह दी जाती है। वहीं कई लोग ग्रहण के समय भोजन बनाने, यात्रा या शुभ कार्य करने से बचते हैं। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है हालांकि यह मान्यता आधारित परंपरा है।
2026 में फरवरी और मार्च के बीच सूर्य और चंद्र ग्रहण का क्रम बन रहा है, जिसने धार्मिक और ज्योतिषीय हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। भारत में पहला सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा, जबकि चंद्र ग्रहण का असर कुछ क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।