Ramadan 2026 : रूहानियत का महीना 'Ramadan' जल्द! जानें कब रखा जाएगा पहला रोजा और क्या-क्या होते हैं नियम

Edited By Updated: 13 Feb, 2026 10:53 AM

know when the first fast will begin and when will meethi eid be celebrated

फिज़ाओं में रूहानियत, मस्जिदों में कुरान की तिलावत और इफ्तार की खुशबू... वह मुबारक महीना करीब आ रहा है जिसका पूरी दुनिया के मुसलमानों को बेसब्री से इंतजार रहता है। रमजान 2026 को लेकर लोगों के मन में तारीखों को लेकर काफी जिज्ञासा है। लखनऊ की ऐतिहासिक...

Ramadan 2026 : फिज़ाओं में रूहानियत, मस्जिदों में कुरान की तिलावत और इफ्तार की खुशबू... वह मुबारक महीना करीब आ रहा है जिसका पूरी दुनिया के मुसलमानों को बेसब्री से इंतजार रहता है। रमजान 2026 को लेकर लोगों के मन में तारीखों को लेकर काफी जिज्ञासा है। लखनऊ की ऐतिहासिक टीले वाली मस्जिद के शाही इमाम, मौलाना सैय्यद फ़ज़लुल्ल मन्नान रहमानी ने इस पवित्र महीने से जुड़े हर पहलू पर विस्तार से रोशनी डाली है।

19 फरवरी से शुरू हो सकता है सब्र का सफर

इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के अनुसार रमजान नौवां और सबसे पवित्र महीना है। इसकी शुरुआत पूरी तरह चांद के दीदार पर टिकी है। मौलाना रहमानी के अनुसार संभावना है कि 19 फरवरी 2026 को पहला रोजा रखा जाए। यदि 18 फरवरी की शाम को शाबान का चांद दिखता है तो उसी रात से तरावीह शुरू हो जाएगी।

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कब मनेगी मीठी ईद 

पूरे 29 या 30 रोजों की इबादत के बाद शव्वाल महीने की पहली तारीख को ईद मनाई जाती है। यदि रमजान 19 फरवरी से शुरू होता है तो 20 या 21 मार्च 2026 को देश भर में ईद-उल-फित्र का जश्न मनाया जा सकता है। यह दिन न केवल जश्न का है बल्कि अल्लाह के शुक्राने और आपसी गले मिलने का त्योहार है।

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सहरी और इफ्तार: रूहानी ऊर्जा का आधार

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शबे कद्र और अलविदा जुमा का महत्व

रमजान के आखिरी 10 दिनों (अशरा) की विषम रातों (21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं) में शबे कद्र की तलाश की जाती है। इसे हजार महीनों से बेहतर रात माना गया है। वहीं रमजान का आखिरी शुक्रवार अलविदा जुमा कहलाता है जिसमें दुनिया भर की मस्जिदों में अमन और चैन की विशेष दुआएं मांगी जाती हैं।

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जकात: समाज में बराबरी का संदेश

रमजान में दान-पुण्य यानी जकात का विशेष महत्व है। मौलाना रहमानी ने बताया कि अपनी संपत्ति का एक निश्चित हिस्सा (जैसे ₹1000 पर ₹25) गरीबों और जरूरतमंदों को देना अनिवार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में आर्थिक असमानता को कम करना और सहानुभूति को बढ़ावा देना है।

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