Chandra Grahan 2026 : इस दिन लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, जानें सूतक काल का सही समय

Edited By Updated: 10 Feb, 2026 01:05 PM

chandra grahan 2026 the first lunar eclipse of the year will occur on this day

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा यानी होली के दिन 3 मार्च को लगेगा। यह ग्रहण कुंभ राशि में होगा और शाम 6:27 बजे से 6:45 बजे तक रहेगा। ग्रहण के पहले सुबह 9:39 बजे से सूतक काल शुरू होगा। इस दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ और खाना-पीना वर्जित...

नेशनल डेस्क : साल 2026 में पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि यानी होली के दिन 3 मार्च को लगने वाला है। खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण कुंभ राशि में लगेगा, जिसका स्वामी ग्रह शनि हैं। इस ग्रहण का समय शाम 6:27 बजे से लेकर 6:45 बजे तक रहेगा।

चंद्र ग्रहण कब और कहां देखा जा सकेगा?

यह ग्रहण भारत समेत कई देशों में दिखाई देगा। यूरोप, एशिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका में भी इसका दर्शन संभव होगा। धार्मिक दृष्टि से, ग्रहण का सूतक काल भी मान्य होगा।

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सूतक काल क्या है? (Grahana Sutak Kaal)

सूतक काल का अर्थ है ग्रहण के पूर्व और ग्रहण के दौरान शुभ कार्यों पर रोक लगाना। शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले शुरू होता है।

  • इस साल ग्रहण शाम 6:27 बजे लगने वाला है।
  • ऐसे में भारत में इसका सूतक काल सुबह 9:39 बजे से शुरू होगा।

सूतक काल के दौरान धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इस समय किसी भी प्रकार का शुभ कार्य, पूजा-पाठ, हवन या आयोजन नहीं करना चाहिए।

चंद्र ग्रहण के दौरान पालन करने वाले नियम

ग्रहण और सूतक काल में कई नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है। कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

1. खाना-पीना: ग्रहण और सूतक काल के दौरान भोजन से परहेज करना चाहिए।

2. धार्मिक क्रियाएं: मंदिर के कपाट ग्रहण काल में बंद हो जाते हैं, इसलिए इस समय पूजा या हवन नहीं करना चाहिए।

3. साधारण नियम:

  • चाकू, कैंची, सुई जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल न करें।
  • बाल काटना और नाखून काटना वर्जित है।

4. आध्यात्मिक अनुशासन: इस समय ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है।

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विशेष महत्व

यह चंद्र ग्रहण होली और होलिका दहन के दिन लग रहा है। इस दिन लोग आग जलाते हैं और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानते हैं। ग्रहण के साथ यह और भी धार्मिक महत्व रखता है। कुंभ राशि में लगने वाला ग्रहण शनि के प्रभाव को दर्शाता है, जो जीवन में अनुशासन, कर्म और धैर्य से जुड़े मामलों पर असर डाल सकता है।

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