Mahashivratri 2026: भोलेनाथ की आराधना का महापर्व, जानिए सही तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व और पूरी विधि

Edited By Updated: 07 Feb, 2026 06:37 PM

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महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन और फलदायी पर्व माना जाता है। यह केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि शिव-शक्ति के मिलन और आत्मिक जागरण का विशेष अवसर है।

नेशनल डेस्क: महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन और फलदायी पर्व माना जाता है। यह केवल उपवास का दिन नहीं, बल्कि शिव-शक्ति के मिलन और आत्मिक जागरण का विशेष अवसर है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन की गई पूजा, जप और व्रत से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

महाशिवरात्रि 2026 की सही तिथि: 15 या 16 फरवरी?

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 5:04 बजे,चतुर्दशी समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 5:34 बजे। शास्त्रों के नियमों के मुताबिक, महाशिवरात्रि वही दिन मानी जाती है जब चतुर्दशी तिथि निशीथ काल (मध्यरात्रि) में उपस्थित हो। चूंकि 15 फरवरी की रात निशीथ काल में चतुर्दशी विद्यमान रहेगी, इसलिए व्रत और मुख्य पूजा 15 फरवरी को ही की जाएगी।

निशीथ काल पूजा मुहूर्त

  • लगभग रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (16 फरवरी की मध्यरात्रि)
  •  पारण (व्रत खोलने) का समय
  • 16 फरवरी सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक

महाशिवरात्रि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि पर की गई साधना सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना फल देती है। भक्त इस दिन उपवास रखते हैं,रात भर जागरण करते हैं और चार प्रहर में शिव पूजन करते हैं। मान्यता है कि इस दिन शिव आराधना से पापों का नाश, मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि चार प्रहर की पूजा संभव न हो, तो कम से कम एक प्रहर में विधिवत पूजन अवश्य करना चाहिए।

Mahashivratri 2026 Puja Vidhi 

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें
  • शिवलिंग या शिव-पार्वती की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें
  • दूध, दही, शहद, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक करें।

चार प्रहर की पूजा करें—

  • प्रथम प्रहर: शाम 6:11 – 9:23
  • द्वितीय प्रहर: 9:23 – 12:35 AM
  • तृतीय प्रहर: 12:35 – 3:47 AM
  • चतुर्थ प्रहर: 3:47 – 6:59 AM
  • बेलपत्र, भांग, धतूरा, पुष्प अर्पित करें
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें
  • रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन करें
  • सुबह पूजा पूर्ण कर पारण करें

महाशिवरात्रि पूजा के लिए आवश्यक सामग्री 

  • बेलपत्र, धतूरा, भांग
  • शिवलिंग या शिव-पार्वती की मूर्ति/तस्वीर
  • मदार या अन्य फूलों की माला
  • शमी पत्र, सफेद फूल या कमलगट्टा
  • चंदन, केसर
  • अक्षत, जनेऊ
  • पान, सुपारी, इलायची, लौंग
  • इत्र, भस्म, रक्षा सूत्र
  • कुश का आसन
  • अभिषेक सामग्री: दूध, दही, शहद, शक्कर, गंगाजल
  • भगवान शिव के वस्त्र

माता पार्वती के लिए लाल चुनरी और श्रृंगार सामग्री

  • फल, मिठाई या हलवा (भोग)
  • हवन सामग्री (यदि हवन करें)

महाशिवरात्रि 2026 आत्मिक शुद्धि, ध्यान और साधना का सर्वोत्तम अवसर है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति लाता है। इस पावन दिन ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए महादेव की कृपा प्राप्त करें।

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