Edited By Parveen Kumar,Updated: 12 Feb, 2026 11:00 PM

क्रिकेट प्रेमियों के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भावनाओं का विस्फोट होता है। टी20 वर्ल्ड कप को लेकर आईसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के बीच चली तनातनी सुलझने के बाद अब फैंस की निगाहें इस हाई-वोल्टेज...
नेशनल डेस्क : क्रिकेट प्रेमियों के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि भावनाओं का विस्फोट होता है। टी20 वर्ल्ड कप को लेकर आईसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के बीच चली तनातनी सुलझने के बाद अब फैंस की निगाहें इस हाई-वोल्टेज भिड़ंत पर टिक गई हैं। लेकिन रोमांच और प्रतिद्वंद्विता से परे, यह मुकाबला आर्थिक लिहाज से भी बेहद बड़ा आयोजन होता है।
हजारों करोड़ की कमर्शियल वैल्यू
इंडस्ट्री अनुमानों के अनुसार, 2026 में खेले जाने वाले एक भारत-पाक मैच की कुल व्यावसायिक कीमत 2,200 करोड़ से 4,500 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा ब्रॉडकास्टिंग राइट्स का होता है। टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस मैच के दौरान विज्ञापन दरें आसमान छूने लगती हैं।
प्राइम टाइम में 10 सेकंड के विज्ञापन स्लॉट की कीमत 25 से 40 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। व्यूअरशिप के अनुमान और प्रसारण मंच के आधार पर यह आंकड़ा बदलता है। केवल भारतीय बाजार से ही एक मुकाबले में करीब 2,500 करोड़ रुपये तक का विज्ञापन राजस्व जुटाया जा सकता है।
टिकट और स्टेडियम से मोटी कमाई
मैच चाहे किसी भी देश में हो- भारत, यूएई या श्रीलंका- टिकट मिनटों में बिक जाते हैं। सामान्य टिकट से लेकर वीआईपी पास और कॉर्पोरेट बॉक्स तक, स्टेडियम रेवेन्यू सैकड़ों करोड़ में पहुंच जाता है। इसके अलावा, मैदान के भीतर ब्रांडिंग- जैसे बाउंड्री रोप, एलईडी बोर्ड और ऑन-ग्राउंड स्पॉन्सरशिप- भी बड़ी आय का जरिया बनती है।
मेजबान शहर को आर्थिक बूस्ट
भारत-पाक मैच का असर केवल क्रिकेट बोर्ड तक सीमित नहीं रहता। मेजबान शहर की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी जबरदस्त उछाल आता है। बड़े मुकाबलों के दौरान होटलों के कमरे प्रति रात 1 लाख रुपये से अधिक में बुक होते हैं, जबकि फ्लाइट किराए अक्सर तीन गुना तक बढ़ जाते हैं। रेस्तरां, टैक्सी सेवाएं और पर्यटन उद्योग को भी सीधा फायदा होता है।
रेवेन्यू का बंटवारा कैसे?
मैच से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा आईसीसी के पास जाता है, जो अपने रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल के तहत सदस्य बोर्डों में फंड वितरित करता है। बीसीसीआई और पीसीबी दोनों को इस सेंट्रल रेवेन्यू पूल से लाभ मिलता है। अनुमान है कि यह हिस्सा सालाना 34-35 मिलियन डॉलर तक हो सकता है।
क्यों है इतना खास?
भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता, राजनीतिक पृष्ठभूमि और जबरदस्त फैन बेस इस मुकाबले को वैश्विक स्तर पर सुपरहिट बनाते हैं। दुनियाभर में करोड़ों दर्शक इसे लाइव देखते हैं। व्यूअरशिप के आंकड़े कई बार बड़े अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स फाइनल के बराबर पहुंच जाते हैं।