हद हो गई! छुट्टी नहीं मिली तो लोको पायलट ने दफ्तर वालों के सामने उतार दी पैंट, Piles Operation का घाव दिखाकर...

Edited By Updated: 05 Mar, 2026 12:00 PM

humiliation crossed all limits for leave loco pilot forced to show his injuries

रेलवे में काम के दबाव और छुट्टी न मिलने की शिकायतों के बीच एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। लखनऊ रेल मंडल में तैनात एक लोको पायलट को अपनी बीमारी का सबूत देने के लिए भरी दफ्तर में अपने कपड़े उतारने पर मजबूर होना पड़ा। यह कदम उन्होंने तब...

Lucknow Railway Loco Pilot Leave Controversy : रेलवे में काम के दबाव और छुट्टी न मिलने की शिकायतों के बीच एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। लखनऊ रेल मंडल में तैनात एक लोको पायलट को अपनी बीमारी का सबूत देने के लिए भरी दफ्तर में अपने कपड़े उतारने पर मजबूर होना पड़ा। यह कदम उन्होंने तब उठाया जब सीनियर अधिकारियों ने उनके मेडिकल दस्तावेजों को दरकिनार कर उन्हें छुट्टी देने से मना कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार लोको पायलट राजेश मीना (जो अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं) लंबे समय से पाइल्स (बवासीर) की समस्या से जूझ रहे थे। 22 फरवरी को उन्होंने लखनऊ में इसकी सर्जरी कराई थी। डॉक्टरों ने उन्हें 28 फरवरी तक बेड रेस्ट की सलाह दी थी।

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अधिकारियों की पत्थरदिली

28 फरवरी को जब राजेश मीना का घाव पूरी तरह ठीक नहीं हुआ तो वे नियमों के मुताबिक रेलवे हेल्थ यूनिट पहुंचे। वहां के डॉक्टर ने जांच के बाद छुट्टी बढ़ाने की जरूरत महसूस की और अधिकारियों से सिक मेमो लाने को कहा। राजेश मीना ने पहले क्रू कंट्रोलर और फिर चीफ क्रू कंट्रोलर (CCC) रतन कुमार को अपनी लैब रिपोर्ट मेडिकल पर्चे और यहां तक कि ड्रेसिंग भी दिखाई। आरोप है कि इसके बावजूद अधिकारियों का दिल नहीं पसीजा और उन्हें ड्यूटी पर आने का दबाव बनाया गया।

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मजबूरी में उठाया शर्मनाक कदम

मानसिक और शारीरिक पीड़ा से जूझ रहे राजेश मीना ने अंततः आपा खो दिया। अपनी बात को सच साबित करने के लिए उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी के सामने ही अपनी पैंट उतार दी और ऑपरेशन का ताजा घाव दिखाया। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया और रेलवे के व्हाट्सएप ग्रुप्स में तेजी से वायरल हो रहा है।

यूनियन का फूटा गुस्सा

'ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन' (AILRSA) ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। यूनियन नेताओं का कहना है कि यह एक कर्मचारी की गरिमा पर हमला है। यूनियन के हस्तक्षेप के बाद ही राजेश मीना को छुट्टी मिल सकी लेकिन इस घटना ने कर्मचारियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

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प्रशासन की चुप्पी

घटना के वीडियो वायरल होने के बाद रेलवे के उच्च अधिकारी अब इस मामले की जांच की बात कह रहे हैं। हालांकि सवाल यह उठता है कि क्या एक कर्मचारी को अपनी बीमारी साबित करने के लिए इस हद तक अपमानित होना पड़ेगा?

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