Economic Crisis: महाविनाश की आहट: तेल से अनाज तक सब होगा महंगा, IMF ने दी चेतावनी

Edited By Updated: 31 Mar, 2026 01:43 PM

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IMF Warning: मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध इसी तरह चलता रहा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई के एक ऐसे ‘भयंकर चक्रवात’ की चपेट में आ जाएगी, जो विकास की रफ्तार को पूरी तरह जाम कर देगा। तेल से अनाज तक सब होगा महंगा हो जाएगा जिसका...

IMF Warning: मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध ने अब सिर्फ सरहदों को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की जेब और रसोई को भी निशाने पर ले लिया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट ने एक ऐसी डरावनी तस्वीर पेश की है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह संघर्ष इसी तरह चलता रहा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई के एक ऐसे ‘भयंकर चक्रवात’ की चपेट में आ जाएगी, जो विकास की रफ्तार को पूरी तरह जाम कर देगा। तेल से अनाज तक सब होगा महंगा हो जाएगा जिसका सीधा असर आम आदमी की जेबर पर पड़ेगा। 

होर्मुज की घेराबंदी और ऊर्जा का संकट
दुनिया की रगों में दौड़ने वाले तेल और गैस का एक बड़ा हिस्सा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है। आंकड़ों की मानें तो दुनिया का लगभग 30% कच्चा तेल और 20% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से सप्लाई होती है। युद्ध के कारण अगर यह रास्ता बंद या प्रभावित होता है, तो भारत समेत एशिया और यूरोप के उन तमाम देशों की कमर टूट जाएगी जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर हैं। ईंधन की आसमान छूती कीमतें न केवल माल ढुलाई महंगी करेंगी, बल्कि आम आदमी की खरीदारी की ताकत को भी खत्म कर देंगी।

गरीब मुल्कों पर टूटेगा दुखों का पहाड़
IMF ने आगाह किया है कि इस युद्ध की सबसे कड़वी मार अफ्रीका और एशिया के गरीब देशों को झेलनी पड़ेगी। इन देशों के लिए संकट दोहरा है- एक तरफ तेल महंगा हो रहा है, तो दूसरी तरफ खेती के लिए जरूरी उर्वरक और खाद की कीमतें भी बेकाबू हो रही हैं। इससे अनाज उत्पादन घटेगा और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इन हालातों में इन देशों का वजूद अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मदद के भरोसे ही टिक पाएगा।

सप्लाई चेन का बिखराव और बढ़ती कीमतें
युद्ध की आग ने समंदर के रास्तों को असुरक्षित बना दिया है। जहाजों को अब लंबे रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे ट्रांसपोर्टेशन और इंश्योरेंस का खर्च कई गुना बढ़ गया है। इसका सीधा असर हर छोटी-बड़ी चीज की कीमत पर पड़ रहा है। इतना ही नहीं, खाड़ी देशों से मिलने वाली हीलियम गैस की सप्लाई रुकने से दुनिया भर में सेमीकंडक्टर और मेडिकल उपकरणों का निर्माण ठप हो सकता है। साथ ही, औद्योगिक इस्तेमाल में आने वाले सल्फर की कमी से भारी उद्योगों को भी बड़ा झटका लगने वाला है।

यूरोप में गैस का हाहाकार और बाजार में मंदी के संकेत
यूरोप एक बार फिर 2021-22 जैसे भयानक गैस संकट की दहलीज पर खड़ा है। ब्रिटेन और इटली जैसे देश इस बार सबसे ज्यादा मुश्किल में दिख रहे हैं, हालांकि फ्रांस और स्पेन अपनी परमाणु ऊर्जा की वजह से खुद को थोड़ा बचा सकते हैं। वहीं, शेयर बाजारों का हाल भी बुरा है; बॉन्ड यील्ड बढ़ने से कर्ज लेना महंगा हो गया है। निवेश की कमी और बढ़ती बेरोजगारी के बीच दुनिया एक बड़े वित्तीय संकट की ओर बढ़ती दिख रही है।

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