Strait of Hormuz में ईरान की वसूली! सुरक्षित रास्ते के बदले मांगे 20 लाख डॉलर, भारत समेत दुनिया भर में तेल संकट गहराया

Edited By Updated: 20 Mar, 2026 01:31 PM

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मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाला व्यापार लगभग ठप हो गया है। 'फाइनेंशियल टाइम्स' की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच ईरान कुछ चुनिंदा जहाजों को ही इस रास्ते से गुजरने की इजाजत दे रहा है। दावा...

इंटरनेशनल डेस्क। मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाला व्यापार लगभग ठप हो गया है। 'फाइनेंशियल टाइम्स' की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच ईरान कुछ चुनिंदा जहाजों को ही इस रास्ते से गुजरने की इजाजत दे रहा है। दावा किया गया है कि एक तेल टैंकर कंपनी ने सुरक्षित पैसेज के लिए ईरान को 20 लाख डॉलर (करीब 16.5 करोड़ रुपये) का भुगतान किया है।

ईरान का समुद्री टैक्स और नया कंट्रोल

शिपिंग अधिकारियों और विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान इस अहम जलमार्ग पर अपना पूरा एकाधिकार (Monopoly) साबित करना चाहता है। इस हफ्ते भारत, पाकिस्तान और ग्रीस के कम से कम आठ जहाजों ने ईरानी तट के पास 'लराक आइलैंड' से एक अलग रास्ता अपनाते हुए होर्मुज पार किया। रिपोर्ट बताती है कि कई जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम (Automatic Tracking System) बंद कर दिए हैं ताकि उनकी लोकेशन और सौदे का पता न चल सके।

दुनिया पर क्या पड़ रहा है असर?

जंग से पहले दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता था जो अब 96% तक घट गया है। कच्चे तेल के दाम आसमान छूते हुए 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। ईरान के गैस फील्ड्स पर इजरायली हमलों के बाद यूरोप में गैस की कीमतें 30% तक बढ़ गई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रास्ते पर काफी निर्भर है इसलिए नई दिल्ली लगातार तेहरान के संपर्क में है।

ईरान की रणनीति क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार ईरान इस संकट का इस्तेमाल दो तरह से कर रहा है:

ताकत का प्रदर्शन: अमेरिका और इजरायल को यह दिखाना कि समुद्र की चाबी उसके पास है।

ट्रंप प्रशासन पर दबाव: ऊर्जा सप्लाई बाधित कर अमेरिका की नई सरकार पर कूटनीतिक दबाव बनाना।

चीन के साथ दोस्ती: चीन की 'कॉस्को' कंपनी के 9 जहाज होर्मुज पार करने की तैयारी में हैं क्योंकि चीन अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से तेल खरीदता रहा है।

भविष्य की नई व्यवस्था

ईरान के पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद मोखबर ने संकेत दिया है कि युद्ध खत्म होने के बाद ईरान इस जलमार्ग के लिए एक 'नई व्यवस्था' लागू करेगा। इसका मतलब है कि भविष्य में इस रास्ते से गुजरना पहले जैसा आसान या मुफ्त नहीं होगा।

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