FCRA संशोधन पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी का भारत ने दिया करारा जवाब, बोला- कानून बनाना संसद का अधिकार, अमेरिका में भी ऐसे नियम

Edited By Updated: 07 Aug, 2026 04:38 PM

india gives a sharp retort to the us lawmaker remarks on the fcra

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधन को लेकर अमेरिका की ओर से की गई टिप्पणी पर भारत ने स्पष्ट और सख्त प्रतिक्रिया दी है।

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधन को लेकर अमेरिका की ओर से की गई टिप्पणी पर भारत ने स्पष्ट और सख्त प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत से जुड़े विधायी फैसले पूरी तरह देश का आंतरिक मामला हैं और इन पर निर्णय लेने का अधिकार केवल भारतीय संसद को है।  

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने FCRA पर की गई टिप्पणियां देखी हैं। भारत से जुड़े विधायी मामले हमारे आंतरिक विषय हैं और इन पर देश की संसद फैसला करती है। अमेरिका सहित कई देशों में भी विदेशी फंड के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए कानून और नियम मौजूद हैं।"

सार्वजनिक तौर पर आया था पोस्ट

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने प्रस्तावित FCRA संशोधन की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि यह संशोधन भारत के ईसाई समुदाय और चर्च से जुड़े संस्थानों पर असर डाल सकता है। राइली मूर ने अपने बयान में कहा कि भारत में ईसाई समुदाय का इतिहास बहुत पुराना है, लेकिन अब संसद ऐसे संशोधनों पर विचार कर रही है जिनसे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थानों पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कदम भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।

मानसून सत्र में प्रस्ताव

दरअसल, संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट, 2010 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। यह कानून तय करता है कि गैर-सरकारी संगठन (NGO), धार्मिक संस्थाएं, शैक्षणिक संस्थान और चैरिटेबल ट्रस्ट विदेशी फंड कैसे प्राप्त करेंगे और उसका उपयोग किस तरह करेंगे। वर्तमान व्यवस्था के तहत विदेशी चंदा लेने के लिए गृह मंत्रालय में पंजीकरण अनिवार्य है। प्रस्तावित संशोधनों को लेकर विपक्षी दलों और कुछ गैर-सरकारी संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि नए प्रावधान लागू होने पर विदेशी फंड पर निर्भर संस्थाओं पर सरकार का नियंत्रण बढ़ सकता है। वहीं कुछ चर्च और धार्मिक संगठनों ने आशंका जताई है कि यदि उनका FCRA पंजीकरण समय पर नवीनीकृत नहीं हुआ तो उनके द्वारा संचालित स्कूल, अस्पताल और अन्य संस्थानों के संचालन पर असर पड़ सकता है।

केंद्र सरकार की दलील

हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि FCRA का उद्देश्य विदेशी फंडिंग व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय निगरानी सुनिश्चित करना है। सरकार का यह भी तर्क है कि विदेशी धन के उपयोग को नियंत्रित करने वाले कानून केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका समेत कई लोकतांत्रिक देशों में भी मौजूद हैं।

भारत ने अपने जवाब में यह स्पष्ट संदेश दिया है कि संसद में प्रस्तावित किसी भी कानून पर अंतिम फैसला भारतीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत होगा और इस संबंध में बाहरी देशों की टिप्पणियां भारत की विधायी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकतीं।  

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