Edited By Tanuja,Updated: 24 Mar, 2026 02:11 PM

मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के परमाणु ठिकानों के पास हमलों से वैश्विक चिंता बढ़ गई है। WHO ने चेतावनी दी है कि हालात बेहद खतरनाक मोड़ पर हैं। 13 देशों में इमरजेंसी तैयारी शुरू हुई, लेकिन अभी तक किसी परमाणु विस्फोट या रेडिएशन का सबूत नहीं मिला है।
International Desk: मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंचता नजर आ रहा है। ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष के दौरान परमाणु ठिकानों के आसपास हमलों की खबरों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।सबसे ज्यादा चिंता नतांज परमाणु परिसर (ईरान) और डिमोना परमाणु केंद्र (इजरायल) को लेकर है। ये दोनों ही बेहद संवेदनशील न्यूक्लियर साइट्स हैं। इनके आसपास किसी भी तरह का हमला बड़े परमाणु हादसे का कारण बन सकता है।
WHO की बड़ी चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने साफ कहा है कि हालात “खतरनाक मोड़” पर पहुंच चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि परमाणु स्थलों को निशाना बनाना बेहद जोखिम भरा है इससे रेडिएशन लीक हो सकता है। लाखों लोगों की सेहत और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने सभी देशों और पक्षों से तुरंत संयम बरतने की अपील की है।WHO प्रमुख ने कहा कि “युद्ध शांति नहीं लाता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए नफरत बढ़ाता है।”उन्होंने सभी देशों से अपील की है कि हालात को और बिगड़ने से रोका जाए।
13 देशों में ‘इमरजेंसी तैयारी’ क्यों?
किसी भी देश या एजेंसी ने परमाणु विस्फोट की पुष्टि नहीं की है । अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार भी तक कोई असामान्य रेडिएशन स्तर नहीं मिला। यानी फिलहाल “न्यूक्लियर बम फटने” की बात की पुष्टि नहीं हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO ने 13 देशों में मेडिकल स्टाफ को ट्रेनिंग दी
आपातकालीन स्वास्थ्य सिस्टम तैयार किए और रेडिएशन जैसी आपदा से निपटने की तैयारी बढ़ाई। यह कदम संभावित खतरे के लिए एहतियात (precaution) है, न कि किसी तय हमले का संकेत है।
अगर परमाणु हादसा हुआ तो क्या होगा?
- WHO के मुताबिक: तुरंत बड़े पैमाने पर मौतें
- लंबे समय तक कैंसर और बीमारियां
- हवा, पानी और जमीन प्रदूषित
- आने वाली पीढ़ियों पर असर
- इसलिए दुनिया भर की एजेंसियां इसे रोकने के लिए अलर्ट पर हैं।