भारत AI क्रांति का केवल हिस्सा नहीं है बल्कि वह इसका नेतृत्व कर रहा है: प्रधानमंत्री मोदी

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 12:51 PM

india is not just a part of the ai revolution but is leading it

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) की पहुंच सभी तक होनी चाहिए और इसे खासकर 'ग्लोबल साउथ' के लिए समावेशिता तथा सशक्तीकरण का साधन बनाया जाना चाहिए।

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) की पहुंच सभी तक होनी चाहिए और इसे खासकर 'ग्लोबल साउथ' के लिए समावेशिता तथा सशक्तीकरण का साधन बनाया जाना चाहिए। 'ग्लोबल साउथ' से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, अल्प विकसित अथवा अविकसित माना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया एवं लातिन अमेरिका में स्थित हैं।

मोदी ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट' शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रदर्शनी भारत में हो रही है, जो मानवता के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जहां दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है और जो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिभा के सबसे बड़े भंडार का केंद्र है। उन्होंने शिखर सम्मेलन में विश्व के नेताओं और अग्रणी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) की उपस्थिति में कहा, ''कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव इतिहास में एक परिवर्तनकारी अध्याय है।

भारत एआई क्रांति का केवल हिस्सा नहीं है, बल्कि वह इसका नेतृत्व कर रहा है और इसे आकार भी दे रहा है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत न केवल प्रौद्योगिकी बनाता है बल्कि उसे अभूतपूर्व गति से अपनाता भी है। उन्होंने कहा, ''कुछ लोगों को नयी प्रौद्योगिकी को लेकर संदेह है लेकिन युवा पीढ़ी एआई को जिस तरह अपना रही है, वह अभूतपूर्व है। एआई शिखर सम्मेलन की प्रदर्शनी को लेकर भी यहां जबरदस्त उत्साह रहा है।''

प्रधानमंत्री ने कहा, ''मानव इतिहास में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ रहे हैं जिन्होंने सदियों को आकार दिया। इन मोड़ ने सभ्यता की दिशा तय की और विकास की रफ्तार को बदल दिया। कृत्रिम मेधा इतिहास में ऐसा ही एक परिवर्तन है।''

भारत मंडपम में आयोजित शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले दुनियाभर के नेताओं में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायका, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेई प्लेनकोविक, सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस और फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो शामिल हैं। 

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