Edited By Tanuja,Updated: 23 Jun, 2026 05:12 PM

पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच भारत-रूस के बीच पूर्वी समुद्री गलियारा (EMC) रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। चेन्नई और व्लादिवोस्तोक को जोड़ने वाला यह मार्ग रूस से ऊर्जा और खनिज आपूर्ति का तेज, सुरक्षित और कम लागत वाला...
International Desk: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक शृंखलाओं पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे समय में भारत और रूस के बीच विकसित किया गया ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर (EMC) भारत के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक व्यापार मार्ग के रूप में उभर रहा है। यह समुद्री मार्ग भारत के Chennai Port को रूस के सुदूर पूर्व में स्थित Vladivostok बंदरगाह से जोड़ता है और इसे आर्थिक तथा सामरिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने वर्ष 2024 में इस मार्ग को सक्रिय किया था, जब लाल सागर क्षेत्र में हमास-इजरायल संघर्ष के प्रभाव के चलते यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाया जा रहा था। अब अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान ने इस समुद्री गलियारे की उपयोगिता को और बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, EMC के जरिए रूस से भारत आने वाले जहाजों का ट्रांजिट समय लगभग 24 दिन रह जाता है, जबकि पारंपरिक Suez Canal मार्ग से यही यात्रा 40 दिनों से अधिक समय ले सकती है।इससे भारत को रूस से कच्चा तेल, कोकिंग कोल और अन्य महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की तेज और अपेक्षाकृत कम लागत वाली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।भारत की इस्पात और ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रूस से निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना रणनीतिक आवश्यकता बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो EMC भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत सरकार की Sagarmala Project के तहत बंदरगाह अवसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। इससे रूस से आने वाले कच्चे माल और ऊर्जा संसाधनों को भारतीय बंदरगाहों से देश के विभिन्न हिस्सों तक तेज़ी और कम लागत में पहुंचाना संभव होगा।
यह समुद्री गलियारा भारत की Act East Policy के अनुरूप भी माना जा रहा है। इसके माध्यम से भारत पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ अपनी आर्थिक और सामरिक भागीदारी मजबूत कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की भारत की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है। EMC भारत को उभरते हुए आर्कटिक क्षेत्र तक पहुंच बनाने में भी मदद कर सकता है। प्राकृतिक संसाधनों, दुर्लभ खनिजों और नई समुद्री व्यापारिक संभावनाओं के कारण आर्कटिक अब वैश्विक शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा का नया केंद्र बनता जा रहा है।रिपोर्ट के अनुसार, चीन पहले ही आर्कटिक मार्ग का उपयोग कर यूरोप तक तेज़ समुद्री परिवहन का प्रदर्शन कर चुका है। ऐसे में भारत के लिए भी इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।