भारत बनेगा ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब, हजारों भारतीयों को मिलेगी नौकरी... सरकार के इस फैसले से बदलेगी तस्वीर

Edited By Updated: 03 Jan, 2026 09:04 PM

india will become a global electronics hub creating thousands of jobs for india

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर अब तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 नई परियोजनाओं को मंजूरी देकर बड़ा संकेत दे दिया है। इन परियोजनाओं के जरिए देश में करीब 41,863...

नेशनल डेस्क: भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर अब तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत 22 नई परियोजनाओं को मंजूरी देकर बड़ा संकेत दे दिया है। इन परियोजनाओं के जरिए देश में करीब 41,863 करोड़ रुपये का निवेश आएगा, जबकि 33,791 नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। इसे भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य अब सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स की असेंबली तक सीमित नहीं है। फोकस तेजी से हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी की ओर शिफ्ट हो रहा है। इससे मोबाइल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर जैसे सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा और आयात पर निर्भरता भी कम होगी।

आठ राज्यों में फैलेगा विकास का दायरा

इन स्वीकृत परियोजनाओं को आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्थापित किया जाएगा। इससे औद्योगिक विकास कुछ चुनिंदा राज्यों तक सीमित न रहकर पूरे देश में फैलेगा। रोजगार और निवेश के नए अवसर बनने से संतुलित औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

एपल सप्लाई चेन से जुड़े वेंडर्स का बड़ा दांव

भारत में एपल की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने के साथ-साथ उसके सप्लाई चेन से जुड़े वेंडर्स भी भारी निवेश कर रहे हैं। कई कंपनियां भविष्य में भारत को ही इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के ग्लोबल एक्सपोर्ट बेस के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बना रही हैं। इससे भारत की पहचान सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग हब ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट सेंटर के रूप में भी मजबूत होगी।

इन सेक्टरों में लगेगा सबसे ज्यादा पैसा

इस चरण में सबसे अधिक निवेश मोबाइल और डिवाइस एनक्लोजर यानी बाहरी ढांचे बनाने वाली इकाइयों में होगा। इसके अलावा प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), लिथियम-आयन बैटरी सेल, कैमरा मॉड्यूल और डिस्प्ले मॉड्यूल जैसे अहम कंपोनेंट्स पर भी खास जोर दिया जाएगा। ये सभी कंपोनेंट्स स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बेहद जरूरी हैं।

सरकार का साफ संदेश

आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार सिर्फ योजनाएं घोषित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके तेज और प्रभावी क्रियान्वयन पर भी पूरा ध्यान दे रही है। उन्होंने कंपनियों से डिजाइन इनोवेशन और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को अपनाने की अपील की, ताकि भारतीय उत्पाद ग्लोबल मार्केट में मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

दिग्गज कंपनियों की मजबूत मौजूदगी

इन परियोजनाओं में फॉक्सकॉन, सैमसंग, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, डिक्सन टेक्नोलॉजीज और हिंडाल्को जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। खासतौर पर तमिलनाडु में फॉक्सकॉन की एक परियोजना से 16 हजार से ज्यादा नौकरियां पैदा होने की संभावना है। इससे साफ है कि यह निवेश सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर लाखों लोगों की जिंदगी पर असर डालेगा।

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