Edited By Parveen Kumar,Updated: 14 Jun, 2026 08:02 PM

रोमानिया में काम करने वाले भारतीय मूल के एक मज़दूर ने बर्फीली झील में डूब रही 5 साल की बच्ची की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी। इस बहादुरी भरे काम के लिए उन्हें रोमानिया के शहर क्रायोवा की मानद नागरिकता दी गई है। विपिन कुमार की बहादुरी...
नेशनल डेस्क : रोमानिया में काम करने वाले भारतीय मूल के एक मज़दूर ने बर्फीली झील में डूब रही 5 साल की बच्ची की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी। इस बहादुरी भरे काम के लिए उन्हें रोमानिया के शहर क्रायोवा की मानद नागरिकता दी गई है। विपिन कुमार की बहादुरी की चर्चा अब पूरे देश में हो रही है।
चलते-फिरते हुआ हादसा
विपिन कुमार ने स्थानीय टीवी चैनल डिजी-24 को बताया कि वह एक दोस्त के साथ टहल रहे थे, तभी उन्होंने झील के बर्फीले पानी में एक छोटी बच्ची को डूबते हुए देखा। हालात की गंभीरता को समझते हुए, वह बिना देर किए झील में कूद पड़े। विपिन ने कहा, "पानी बहुत ठंडा था और सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ। उस समय मेरे मन में बस यही ख्याल था कि बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लूँ।"
बर्फ टूटने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बच्ची झील की जमी हुई सतह पर पहुंच गई थी, तभी उसके नीचे की बर्फ टूट गई और वह पानी में गिर गई। विपिन एक स्लेज की मदद से उसकी ओर बढ़े, लेकिन रास्ते में उनके नीचे की बर्फ भी टूट गई। इसके बावजूद, उन्होंने बच्ची का हाथ थामे रखा और उसे बर्फीले पानी में डूबने नहीं दिया, जब तक कि बचाव दल मौके पर नहीं पहुंच गया।
बचाव की कोशिश में पिता भी फंसे
यह घटना तब हुई जब बच्ची अपने माता-पिता के साथ शहर के एक पार्क में घूमने आई थी। बच्ची स्लेज से उतरकर झील की ओर भागी और हादसे का शिकार हो गई। उसे बचाने के लिए उसके पिता भी झील में उतरे, लेकिन वह भी टूटी हुई बर्फ में फंस गए। इसके बाद लोगों ने तुरंत इमरजेंसी सेवाओं को सूचना दी।
दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया
बचाव अभियान के बाद विपिन कुमार और बच्ची दोनों को अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों को हाइपोथर्मिक शॉक (बहुत ज़्यादा ठंड के कारण शरीर का तापमान गिरना) लगा था, लेकिन उनकी हालत स्थिर थी और समय पर इलाज मिलने से कोई बड़ा खतरा टल गया।
परिवार से मिलन की तैयारी
विपिन कुमार की बहादुरी से प्रभावित होकर उनकी कंपनी के मालिक उन्हें इनाम के तौर पर भारत की यात्रा कराने के बारे में सोच रहे हैं ताकि वह अपने परिवार से मिल सकें। उनकी 8 साल की बेटी भारत में रहती है और परिवार उनसे काफी समय से दूर है। कुछ महीने पहले नौकरी की तलाश में रोमानिया आए विपिन कुमार आज क्रायोवा के सबसे सम्मानित लोगों में शामिल हो गए हैं। उनकी हिम्मत और तुरंत लिए गए फ़ैसले ने न सिर्फ़ एक बेगुनाह इंसान की जान बचाई, बल्कि यह भी दिखाया कि इंसानियत और बहादुरी की कोई सीमा नहीं होती।
सिटी काउंसिल उन्हें नागरिकता देगी
क्रायोवा की मेयर लिया ओल्गुटा वासिलेस्कु ने विपिन कुमार की हिम्मत की तारीफ़ करते हुए उन्हें शहर की मानद नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि विपिन का निस्वार्थ और मानवीय काम समाज के लिए प्रेरणा है और दूसरे लोगों को भी ऐसे उदाहरणों से सीखना चाहिए। मेयर के अनुसार, विपिन कुमार जून 2025 में भारत से रोमानिया आए थे। उन्होंने हाल ही में डोलज काउंटी के मालु मारे इलाके में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में मज़दूर के तौर पर काम करना शुरू किया था। वह बेहतर नौकरी और अपने परिवार के भविष्य के लिए विदेश आए थे।