Edited By Sahil Kumar,Updated: 02 Jan, 2026 02:31 PM

Indore Contaminated Water Crisis : दूषित पीने के पानी के कारण फैली उल्टी-दस्त की इस गंभीर महामारी के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही...
नेशनल डेस्कः Indore Contaminated Water Crisis : दूषित पीने के पानी के कारण फैली उल्टी-दस्त की इस गंभीर महामारी के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया है। उन्होंने दोषी अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए 3 बड़े सवाल किए हैं। उन्होंने पूछा- सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?
राहुल गांधी का तीखा हमला
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि इंदौर में “पानी नहीं, जहर बांटा गया” और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोता रहा। उन्होंने कहा कि गरीबों के घरों में मातम पसरा है, लेकिन सरकार की ओर से संवेदनहीन और अहंकारी बयान दिए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब लोग बार-बार गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे, तब सप्लाई बंद क्यों नहीं की गई। सीवर का पानी पीने की लाइन में कैसे मिला और समय रहते जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई।
‘साफ पानी जीवन का अधिकार है’
कांग्रेस नेता ने कहा कि साफ पीने का पानी कोई एहसान नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अधिकार की अनदेखी के लिए भाजपा का “डबल इंजन मॉडल”, लापरवाह प्रशासन और असंवेदनशील नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है। राहुल गांधी ने दावा किया कि मध्य प्रदेश कुप्रशासन का केंद्र बनता जा रहा है और गरीबों की मौत पर केंद्र सरकार की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है।
पाइपलाइन में रिसाव बना महामारी की वजह
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने बताया कि एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट से यह साफ हुआ है कि भागीरथपुरा इलाके में पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन में रिसाव था। इसी कारण पानी दूषित हुआ और उसी इलाके से बीमारी की शुरुआत हुई। अधिकारियों के अनुसार, जिस स्थान पर रिसाव मिला, उसके ठीक ऊपर शौचालय बना हुआ था, जिससे सीवर का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल गया।
घर-घर सर्वे, सैकड़ों मरीज प्रभावित
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाके में बड़े पैमाने पर सर्वे किया। गुरुवार को भागीरथपुरा के 1714 घरों में रहने वाले 8571 लोगों की जांच की गई। इनमें से 338 लोगों में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षण पाए गए, जिन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। महामारी के पिछले आठ दिनों में कुल 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 71 को छुट्टी दी जा चुकी है। फिलहाल 201 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं और 32 की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें आईसीयू में रखा गया है।
प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव
इस घटना ने इंदौर की स्वच्छ शहर की छवि पर गहरा दाग लगा दिया है। विपक्षी दलों के तीखे हमलों के बीच प्रशासन पर दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए ठोस व्यवस्था लागू करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।