Edited By Ramanjot,Updated: 07 Mar, 2026 02:22 PM

मध्य-पूर्व में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। षष्ठ भाव में मंगल-राहु की युति बड़े सैन्य हमलों और तकनीकी युद्ध का संकेत दे रही है।
Iran-Israel War: मध्य-पूर्व (Middle East) में बारूद की गंध और मिसाइलों की गड़गड़ाहट ने दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। 6 मार्च 2026 तक के घटनाक्रम बताते हैं कि ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच का यह त्रिकोणीय संघर्ष अब केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक भीषण सैन्य टकराव का रूप ले चुका है। जहां एक ओर सामरिक विशेषज्ञ इसे ऊर्जा मार्गों और सत्ता संतुलन की जंग मान रहे हैं, वहीं ज्योतिषीय गणनाएं इस ओर इशारा कर रही हैं कि आने वाले कुछ दिन वैश्विक सुरक्षा के लिए 'अग्निपरीक्षा' के समान होंगे।
प्रश्न कुंडली का विश्लेषण: संकट गहरा और वास्तविक
5 मार्च 2026 की शाम को निर्मित कन्या लग्न की प्रश्न कुंडली इस अशांति की पुष्टि करती है। कुंडली के अनुसार, चंद्रमा का लग्न में होना यह दर्शाता है कि यह संकट केवल कागजी नहीं, बल्कि धरातल पर अत्यंत सक्रिय है।
ग्रहों का अशुभ योग: गण्ड और हस्त नक्षत्र
पंचांग के अनुसार, इस समय बन रहे योग और नक्षत्र संघर्ष के लंबा खिंचने का संकेत दे रहे हैं:
गण्ड योग: ज्योतिष शास्त्र में इसे उलझाव का योग माना जाता है। इसका अर्थ है कि विवाद सुलझने के बजाय और जटिल होगा।
हस्त नक्षत्र: यह नियंत्रण और तकनीकी संचालन का नक्षत्र है, जो इशारा करता है कि युद्ध में हाई-टेक ड्रोन और मिसाइल प्रणालियों का बड़े पैमाने पर उपयोग होगा।
वणिज करण: यह भविष्य में किसी गुप्त समझौते या 'लेन-देन' के आधार पर समाधान की मंद उम्मीद जगाता है।
षष्ठ भाव में 'पाप ग्रहों' का जमावड़ा: तकनीकी युद्ध का संकेत
कुंडली के छठे भाव (शत्रु भाव) में सूर्य, बुध, मंगल और राहु की युति एक खतरनाक सैन्य गठबंधन की ओर इशारा करती है।
मंगल और राहु: इनका साथ होना अचानक होने वाले आत्मघाती हमलों और अप्रत्याशित सैन्य अभियानों का प्रतीक है।
कुंभ राशि का प्रभाव: चूंकि यह राशि तकनीक से जुड़ी है, इसलिए साइबर युद्ध और सैटेलाइट गाइडेड मिसाइलों की भूमिका इस संघर्ष में निर्णायक होगी।
मार्च का अंतिम सप्ताह: 'पूर्वा भाद्रपद' में मंगल का प्रवेश और बड़ा ट्रिगर
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मार्च का महीना इस युद्ध का भविष्य तय करेगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 20 मार्च 2026 को होगा, जब मंगल 'पूर्वा भाद्रपद' नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
महत्वपूर्ण ग्रह परिवर्तन (मार्च 2026):
| तारीख |
खगोलीय घटना |
संभावित प्रभाव |
| 11 मार्च |
बृहस्पति मार्गी |
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की शुरुआत
|
| 14 मार्च |
सूर्य का मीन |
प्रवेश सत्ता संघर्ष में बदलाव
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| 20 मार्च |
मंगल का नक्षत्र परिवर्तन |
युद्ध का सबसे संवेदनशील मोड़ (ट्रिगर)
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| 26 मार्च |
शुक्र का मेष प्रवेश |
कूटनीतिक दबाव में वृद्धि |
क्या अप्रैल में थमेगी जंग?
ग्रहों की चाल यह संकेत देती है कि मार्च की भारी उथल-पुथल के बाद 6 अप्रैल 2026 से शांति की सुगबुगाहट शुरू हो सकती है। यह पूर्ण शांति न होकर एक 'सीमित युद्धविराम' (Ceasefire) हो सकता है, जहां दुनिया के बड़े देश कूटनीतिक मेज पर लौट सकते हैं।