Iran–Israel War की आग में झुलस सकता है भारत का विदेशी व्यापार, बढ़ेगी महंगाई! एक्‍सपर्ट से जानें

Edited By Updated: 28 Feb, 2026 01:34 PM

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पश्चिम एशिया में गहराता सैन्य संकट अब भारत की आर्थिक नब्ज पर प्रहार करने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़े सीधे संघर्ष ने न केवल कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा की है, बल्कि भारतीय निर्यातकों और व्यापारियों की रातों की नींद भी उड़ा दी है।...

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में गहराता सैन्य संकट अब भारत की आर्थिक नब्ज पर प्रहार करने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़े सीधे संघर्ष ने न केवल कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा की है, बल्कि भारतीय निर्यातकों और व्यापारियों की रातों की नींद भी उड़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव यूं ही बढ़ा, तो इराक, जॉर्डन और सीरिया जैसे देशों के साथ होने वाला भारत का अरबों डॉलर का कारोबार खतरे में पड़ सकता है।

निर्यातकों की बढ़ी चिंता:  मुसीबत में फंसा व्यापार 

एक न्यूज चैनल के हवाले से मुंबई के प्रमुख निर्यातक और टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के चेयरमैन शरद कुमार सराफ के अनुसार, भारतीय व्यापारी इस समय बड़ी मुश्किल में हैं। उन्होंने बताया कि युद्ध की गंभीरता को देखते हुए कई कंपनियों ने ईरान और इजरायल जाने वाली अपनी खेपों (Shipments) को फिलहाल रोक दिया है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आना तय
सराफ ने चेतावनी दी है कि इस तनाव का सबसे बुरा असर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पड़ेगा। यह एक ऐसा समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार गुजरता है। यदि यहां आवाजाही बाधित हुई, तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आना तय है, जिसका सीधा असर भारत में महंगाई के रूप में दिखेगा।

दोहरी मार: लाल सागर के बाद अब नया संकट

भारतीय व्यापारी पहले से ही 'लाल सागर' (Red Sea) में हूती विद्रोहियों के हमलों से परेशान थे, जिसके कारण जहाजों को अफ्रीका का लंबा चक्कर लगाकर 'केप ऑफ गुड होप' से जाना पड़ रहा था। अब ईरान-इजरायल युद्ध ने एक और व्यापारिक मार्ग को असुरक्षित बना दिया है।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक का कहना है कि: "अगर इस क्षेत्र के बंदरगाहों या वित्तीय प्रणालियों में कोई भी रुकावट आती है, तो भारत के सप्लाई चेन को भारी नुकसान होगा। इससे माल ढुलाई (Freight) और बीमा की लागत काफी बढ़ जाएगी।"

दांव पर लगा है अरबों का कारोबार

आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिम एशियाई देशों के साथ भारत का व्यापारिक रिश्ता काफी गहरा है।

देश / क्षेत्र भारत का निर्यात (2024-25) भारत का आयात (2024-25)
ईरान $1.24 अरब $441.8 करोड़
इजरायल $2.1 अरब $1.6 अरब
अन्य पश्चिम एशियाई देश $8.6 अरब $33.1 अरब

ईरान को होने वाले मुख्य निर्यात:

  • बासमती चावल ($75.32 करोड़)

  • सोया मील, चाय, केला और चना।

 अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद यह संघर्ष एक 'क्षेत्रीय युद्ध' का रूप ले चुका है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा (तेल आयात) को कैसे बचाए और अपने निर्यातकों को इस आर्थिक अस्थिरता से कैसे बाहर निकाले।

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