महंगाई, कर्ज और घटती कमाई पर जयराम रमेश ने मोदी सरकार को घेरा

Edited By Updated: 28 Oct, 2026 06:42 PM

jairam ramesh targets modi government over inflation debt and declining earnings

कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई, कर्ज और कथित तौर पर घटती आमदनी को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि सरकार को आर्थिक बदहाली की सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने एवं महंगाई पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

नई दिल्लीः कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई, कर्ज और कथित तौर पर घटती आमदनी को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि सरकार को आर्थिक बदहाली की सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने एवं महंगाई पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में यह दावा भी किया कि केंद्र सरकार महंगाई की वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए आंकड़ों को ''तोड़-मरोड़कर'' पेश कर रही है और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों का सबसे अधिक खामियाजा युवाओं तथा मध्यम वर्ग को भुगतना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा, ''बढ़ती महंगाई, बढ़ता कर्ज, घटती कमाई, मोदी सरकार में मध्यम वर्ग के हिस्से आई सिर्फ तबाही।'' रमेश ने दावा किया कि अर्थव्यवस्था की स्थिति और रोजगार के घटते अवसरों से युवा पीढ़ी सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। उनके मुताबिक, कंपनियां पहले की तुलना में कम भर्तियां कर रही हैं और कई लोगों की वर्षों पुरानी नौकरियां भी जा रही हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि महंगाई की तुलना में आमदनी और बचत घट रही है, जबकि परिवारों पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई परिवार रोजमर्रा का खर्च पूरा करने के लिए भी उधार लेने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि वेतन या तो ठहरा हुआ है या महंगाई को ध्यान में रखने पर लोगों की वास्तविक क्रय शक्ति कम हुई है। रमेश ने दावा किया कि एक ओर अमीरों की संपत्ति और कॉरपोरेट मुनाफा बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए घरेलू बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विषम आर्थिक परिस्थितियों में परिवार अपनी बचत खर्च करके गुजर-बसर करने के लिए मजबूर हैं, लेकिन सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों का हवाला देकर जमीनी वास्तविकता को नकार रही है। कांग्रेस महासचिव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि बढ़ती आर्थिक असमानता देश की प्रमुख चिंताओं में से एक है। उन्होंने कहा, ''जीडीपी के आंकड़े कभी यह नहीं बताते कि विकास का लाभ किसे मिल रहा है और आम आदमी की जिंदगी कितनी बेहतर हो रही है।''

रमेश ने दावा किया कि जब आय और संपत्ति का बड़ा हिस्सा कुछ लोगों के पास सिमटता जाए तथा आम परिवार महंगाई, कर्ज और घटती बचत के दबाव में हों, तो जीडीपी के आंकड़े जमीनी स्थिति को नहीं छिपा सकते। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास का दावा तभी सार्थक है जब उसका लाभ आम आदमी तक पहुंचे। रमेश ने कहा, ''हमारी स्पष्ट मांग है कि सरकार आर्थिक बदहाली की सच्चाई स्वीकार करे, रोजगार के अवसर बढ़ाए और महंगाई पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाए।'' 

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