Edited By Pardeep,Updated: 15 Aug, 2026 10:44 PM

केरल विश्वविद्यालय के कुलपति मोहनन कुन्नुम्मल ने शनिवार को कहा कि जो लोग "वंदे मातरम्" नहीं कहते, वे नहीं जानते कि उनकी मां कौन है। वह यहां मणिविला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के युवा सम्मेलन 'संकल्प 2026 युवा संगम' को संबोधित कर रहे थे।...
तिरुवनंतपुरमः केरल विश्वविद्यालय के कुलपति मोहनन कुन्नुम्मल ने शनिवार को कहा कि जो लोग "वंदे मातरम्" नहीं कहते, वे नहीं जानते कि उनकी मां कौन है। वह यहां मणिविला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के युवा सम्मेलन 'संकल्प 2026 युवा संगम' को संबोधित कर रहे थे। सभा को संबोधित करते हुए कुन्नुम्मल ने कहा कि भारत माता ने ही बच्चों को उनके माता-पिता को सौंपा है।
उन्होंने कहा, "इन बच्चों को विकसित भारत के लिए आपके घरों में सौंपा गया है। उन्हें मेधावी बच्चे और आदर्श नागरिक बनाने की जिम्मेदारी परिवार के प्रत्येक पुरुष और महिला मुखिया की है। मैं कहूंगा कि यह जिम्मेदारी परिवार की महिला मुखिया पर और भी अधिक लागू होती है क्योंकि जहां तक भारत का सवाल है, यह हमारी मां है।" उन्होंने कहा कि इसी वजह से देश को "भारत माता" कहा जाता है।
उन्होंने कहा, "इसीलिए जब हम प्रार्थना करते हैं तो 'वंदे मातरम्' कहते हैं। यह हमारी मां है। इसलिए हम 'वंदे मातरम्' कहते और गाते हैं। जो लोग 'वंदे मातरम्' कहने का विरोध करते हैं, वे नहीं जानते कि उनकी मां कौन है। लेकिन जो लोग जानते हैं कि उनकी मां कौन है... जो मां का अर्थ समझते हैं, वे हमेशा 'वंदे मातरम्' कहेंगे। इसे इसी तरह कहा जाना चाहिए।"
छात्र संगठनों एसएफआई और केएसयू ने आरोप लगाया है कि कुन्नुम्मल केरल विश्वविद्यालय में आरएसएस के एजेंडे को लागू करने का प्रयास कर रहे हैं। केरल के राज्यपाल द्वारा उन्हें कुलपति नियुक्त किए जाने पर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने सवाल उठाए हैं। दोनों गठबंधनों ने आरोप लगाया है कि यह केरल की शिक्षा व्यवस्था को "भगवा रंग देने" का प्रयास है।
एलडीएफ और यूडीएफ ने विश्वविद्यालय के कुलपतियों, जिनमें कुन्नुम्मल भी शामिल हैं, पर आरएसएस द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में कथित रूप से भाग लेने को लेकर बार-बार आरोप लगाए हैं। केंद्र सरकार के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार ने अपने आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में 'वंदे मातरम्' का गायन नहीं किया। केरल में राज्यपाल विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में कार्य करते हैं और कुलपतियों की नियुक्ति करते हैं। पिछली एलडीएफ सरकार का राज्यपाल के साथ कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर विवाद चल रहा था। मौजूदा यूडीएफ सरकार ने भी राज्य के विश्वविद्यालयों में कुछ लोगों को अंतरिम कुलपति नियुक्त किए जाने पर अप्रसन्नता जताई है।