Edited By Ramkesh,Updated: 19 Jun, 2026 10:52 AM

जिन डॉक्टरों को लोग धरती का भगवान मानकर अपनी जिंदगी सौंप देते हैं, उन्हीं पर अब इंसानियत को शर्मसार करने वाले आरोप लगे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कथित तौर पर एक बड़े ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें मरीजों से लाखों रुपये...
नेशनल डेस्क: जिन डॉक्टरों को लोग धरती का भगवान मानकर अपनी जिंदगी सौंप देते हैं, उन्हीं पर अब इंसानियत को शर्मसार करने वाले आरोप लगे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कथित तौर पर एक बड़े ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें मरीजों से लाखों रुपये वसूले जाते थे, जबकि अंग दान करने वाले गरीब डोनर्स को बेहद कम रकम दी जाती थी।
ट्रांसप्लांट के नाम पर मरीजों से करीब 25 लाख रुपये
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ट्रांसप्लांट के नाम पर मरीजों से करीब 25 लाख रुपये तक लिए जाते थे, लेकिन डोनर्स को केवल 5 लाख रुपये देकर सौदा पूरा कर लिया जाता था। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में पैसों का बड़ा खेल चल रहा था और जरूरतमंद लोगों की मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा था।
फर्जी दस्तावेज दिखाकर होता था ट्रांसप्लांट का खेल
आपको बता दें कि ये घटना केरल के निजी अस्पताल की है यहां जब ED की टीम एक साथ कई शहरों में पहुंची। कोच्चि और आसपास के इलाकों फर्जी दस्तावेज दिखाकर होता था ट्रांसप्लांट में 10 स्थानों पर छापेमारी की। ईडी की कार्रवाई कथित मानव अंग तस्करी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जांच के सिलसिले में की है। पूरे नेटवर्क का केंद्र है कासरगोड निवासी मुहम्मद नजीब कल्लात्रा, जिसे पिछले महीने गाजियाबाद से गिरफ्तार किया गया था।
जरूरतमंद को पैसे का लालच देकर अंग दान
सूत्रों के मुताबिक नजीब ऐसे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है, जिसने जरूरतमंद लोगों को पैसे का लालच देकर अंग दान के लिए तैयार किया। एक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों से 20 से 25 लाख वसूले जाते थे, लेकिन किडनी देने वाले गरीब लोगों के हाथ सिर्फ 5 से 10 लाख ही लगते थे। बाकी रकम दलालों जेब में जाती थी। एजेसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या अस्पतालों के कुछ कर्मचारी या अन्य लोग इस खेल में शामिल थे।
ईडी टीम की नजर अस्पतालों के डोनर रजिस्टर
ट्रांसप्लांट रिकॉर्ड और फंड ट्रांजेक्शन पर है। अंदेशा यह भी है कि जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं को कागजों पर सही दिखाने के लिए किसी ने भीतर से मदद की थी। पिछले वर्षों में 20 संदिग्ध किडनी ट्रांसप्लांट इस नेटवर्क के जरिए हुए। हालांकि अस्पतालों का दावा है, कि सभी ट्रांसप्लांट नियमों के तहत किए।
'डॉक्टरों के नकली लेटरहेड बनाते थे'
ईडी को शक है कि डॉक्टरो की मुहरे, मेडिकल सर्टिफिकेट और अस्पतालों के लेटरहेड तक नकली बनाए गए। सांसदो और विधायको के नाम वाले खाली लेटरहेड का दुरुपयोग कर डोनर और रिसीवर के बीच रिश्तेदारी या ब्लड रिलेशन दिखाने की कोशिश की गई। डिजिटल भुगतान, एन्क्रिप्टेड चैट्स का यूज हुआ है। रैकेट का मुख्य आरोपी कासरगोड निवासी मुहम्मद नजीब है। नजीब 'कल्लात्रास मेडिकल टूरिजम प्राइवेट लिमिटेड' नाम से कपनी चलाता था। आरोप है कि उसकी आड़ मे अंगो के अवैध लेनदेन को अंजाम दिया जाता था। रैकेट के दलाल अस्पतालो, अग डोनर्स और मरीजो के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते थे।